सावन माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली कामिका एकादशी का विशेष महत्व है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी के बाद श्री हरि विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं, लेकिन कामिका एकादशी का व्रत करने से साधक को भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों की संयुक्त कृपा प्राप्त होती है. इस बार कामिका एकादशी पर रविवार का दिन होने से सूर्य उपासना के साथ-साथ हर्षण योग, द्विपुष्कर योग, शिववास योग और महालक्ष्मी राजयोग का दुर्लभ संयोग बन रहा है. इस दिन व्रत, दान, स्नान और ध्यान करने से पापों का नाश होता है तथा सुख-समृद्धि और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है. यदि कोई साधक उपवास न कर सके तो सात्विक आहार, विष्णु मंत्रों का जप और तुलसी पूजन करके भी पुण्य प्राप्त कर सकता है. पूजा में पीले पुष्प, पंचामृत और तुलसी दल अर्पित करने का विधान है.