काशी के प्रसिद्ध पिशाच मोचन कुंड (विमलोदक तीर्थ) में पितृपक्ष के दौरान अतृप्त पितरों की मुक्ति के लिए त्रिपिंडी श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण किया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अकाल मृत्यु या प्रेत बाधा से ग्रसित पूर्वजों की शांति के लिए यहां विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं. कुंड के पास स्थित पीपल के पेड़ पर सिक्का रखकर यजमान पितृ ऋण से मुक्ति का संकल्प लेते हैं. इस अनुष्ठान में सात्विक, राजस और तामस बाधाओं से मुक्ति हेतु काले, लाल और सफेद झंडे लगाए जाते हैं और तीन पीढ़ियों के निमित्त पिंडदान किया जाता है. पौराणिक कथा के अनुसार, महादेव के गण कपिर्द की तपस्या से बने इस तीर्थ में एक पिशाच को मुक्ति मिली थी और यहां कपर्दीश्वर महादेव की स्थापना हुई. इसके अलावा, काशी के मणिकर्णिका घाट पर मरणासन्न व्यक्ति को भगवान शिव द्वारा राम नाम का तारक मंत्र दिए जाने की मान्यता का भी विवरण दिया गया है.