श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण की उपासना, विशेष शृंगार और पूजन विधि का विशेष महत्व है. भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में कान्हा के जन्मोत्सव पर श्रद्धालु व्रत रखकर विधि-विधान से पूजा करते हैं. ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग मनोकामनाओं के लिए भगवान के विभिन्न स्वरूपों जैसे लड्डू गोपाल, बंसीधर या राधाकृष्ण की प्रतिमा स्थापित की जाती है. जन्मोत्सव के दौरान मध्यरात्रि में पंचामृत से भगवान की प्रतिमा को स्नान कराया जाता है और पीतांबर, वैजयंती माला व मोर मुकुट से शृंगार किया जाता है. बाल गोपाल को माखन-मिश्री, पंचामृत, पंजीरी और छप्पन भोग का नैवेद्य अर्पित किया जाता है. इस दिन संतान प्राप्ति के लिए तुलसी के पौधे के समीप बाल गोपाल की स्थापना कर विशेष गोपाल मंत्र का जाप करने का विधान भी बताया गया है. विधि-विधान और शुद्ध भाव से की गई उपासना से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं.