भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और बुद्धि प्रदाता माना जाता है, जिनकी उपासना से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और विजय का वरदान मिलता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कार्य सिद्धि के लिए गणपति को मोदक और दुर्वा अर्पित करना विशेष फलदायी होता है. शत्रुओं पर विजय के लिए दुर्वा गणेश स्वरूप की पूजा लाभकारी बताई गई है. इसके साथ ही गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ और 'ॐ गं गणपतये नमः' का नियमित जाप हर बाधा का निवारण करता है. केतु ग्रह के नियंत्रक भगवान गणेश होने के कारण उनकी साधना से केतु से जुड़े कष्ट शांत होते हैं. घर के वास्तु दोष को दूर करने के लिए उत्तर-पश्चिम दिशा में पंचमुखी गणेश जी की स्थापना और नियमित दीपक जलाने की सलाह दी जाती है. पूजन के दौरान पीले वस्त्र धारण करने और गणेश जी को तुलसी दल अर्पित न करने के नियमों का पालन आवश्यक माना गया है.