नवरात्रि की महाष्टमी तिथि पर मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की उपासना और कन्या पूजन का विशेष विधान है. धर्म ग्रंथों के अनुसार मां महागौरी अत्यंत श्वेत वर्ण की हैं, जो वृषभ पर सवार होकर चार भुजाओं में त्रिशूल, डमरू, अभय और वर मुद्रा धारण करती हैं. ज्योतिष के जानकारों के मुताबिक, मां महागौरी की आराधना से रोग, शोक और दरिद्रता का नाश होता है तथा कुंडली में कमजोर शुक्र ग्रह बलवान होता है. विवाह में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए मां को सफेद फूल, मिठाई और चांदी का सिक्का अर्पित कर विशेष मंत्र जप का उपाय बताया गया है. इसके अलावा आर्थिक तंगी से मुक्ति के लिए श्री सूक्त या कनकधारा स्तोत्र के पाठ का महत्व है. महाष्टमी की महानिशा पूजा और कन्या पूजन से सौभाग्य, संतान सुख और मनोकामना पूर्ति का वरदान मिलता है.