नवरात्रि के तीसरे दिन जगत जननी दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की विशेष आराधना की जाती है. मां चंद्रघंटा मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र धारण करती हैं और सिंह पर सवार होकर दस हाथों में अस्त्र-शस्त्र लिए युद्ध मुद्रा में दिखाई देती हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी का यह स्वरूप साहस, वीरता और आत्मविश्वास प्रदान करने के साथ ही सभी प्रकार के भय से मुक्ति दिलाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मां चंद्रघंटा की पूजा से कुंडली में कमजोर मंगल या मंगल दोष से जुड़ी समस्याएं समाप्त होती हैं. इसके निवारण के लिए देवी को लाल वस्त्र, लाल फूल और तांबे की वस्तु अर्पित करने तथा मंगल के मूल मंत्र का जाप करने का विधान है. मां चंद्रघंटा को दूध या दूध से बनी मिठाइयों का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना गया है. इसके अलावा, देवी की पंचोपचार पूजा और विशेष मंत्रों के जाप से दैहिक, दैविक और भौतिक तापों का शमन होता है.