ज्येष्ठ के अधिक मास यानी पुरुषोत्तम मास में आने वाली परमा एकादशी का विशेष महत्व है. यह एकादशी तीन साल में एक बार आती है और इसे हरिवल्लभा के नाम से भी जाना जाता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान श्री लक्ष्मी नारायण की विधि-विधान से पूजा करने से जीवन की दरिद्रता दूर होती है और धन प्राप्ति के योग बनते हैं. इस व्रत का पालन पांच दिनों तक किया जाता है. पूजा में भगवान विष्णु को पीले पुष्प, पंचामृत और तुलसी दल अर्पित करना अनिवार्य माना गया है. आर्थिक तंगी से मुक्ति पाने के लिए इस दिन तुलसी के पास घी का दीपक जलाने, माता लक्ष्मी को खीर का भोग लगाने और 11 कौड़ियों को तिजोरी में रखने जैसे महाप्रयोग बेहद फलदायी होते हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार, सुमेधा और पवित्रा नामक ब्राह्मण दंपत्ति ने भी इस व्रत के प्रभाव से अपनी घोर दरिद्रता से मुक्ति पाई थी. इस दिन स्नान और दान का भी विशेष महत्व शास्त्रों में बताया गया है.