फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को फुलेरा दूज का पावन पर्व मनाया जाता है, जिसे 'अभूज मुहूर्त' माना जाता है. इस दिन बिना पंचांग देखे कोई भी मांगलिक कार्य संपन्न किया जा सकता है. मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने राधा रानी और ब्रजवासियों के साथ पहली बार फूलों की होली खेली थी. यदि किसी की कुंडली में विवाह संबंधी दोष या प्रेम का अभाव है, तो इस दिन राधा-कृष्ण की संयुक्त उपासना से दांपत्य जीवन में मधुरता आती है. पूजा के दौरान 'ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः' का जाप और मधुराष्टक का पाठ विशेष फलदायी होता है. प्रेम संबंधों में सुधार के लिए गुलाबी और वैवाहिक सुख के लिए पीले वस्त्र धारण करने की सलाह दी गई है. इस दिन सात्विक रहकर काले वस्त्रों के त्याग का विधान है.