पितृपक्ष के दौरान पितरों की शांति और पितृ दोष से मुक्ति के लिए दान, तर्पण और पिंडदान का विशेष महत्व बताया गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्राद्ध पक्ष में चांदी, काले तिल, गुड़, अन्न (गेहूं व चावल), नमक, जूते-चप्पल और गाय के घी का दान करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है. काले तिल संकटों से रक्षा करते हैं और अन्न व नमक के दान से पितरों को तृप्ति मिलती है. इसके विपरीत, पितृपक्ष में बासी भोजन, पुराने या काले कपड़े, लोहे की वस्तुएं तथा चाकू व कैंची जैसी धारदार चीजों का दान वर्जित बताया गया है. अग्नि पुराण के अनुसार, कन्या राशि में सूर्य के प्रवेश पर महालय पक्ष में पितर पृथ्वी पर आते हैं और तर्पण ग्रहण कर आशीर्वाद देते हैं. इस दौरान ब्रह्मचर्य का पालन, सात्विक आहार और दोपहर की कुतप वेला में दक्षिण दिशा की ओर मुख करके कुश व काले तिल से तर्पण करने का नियम है.