ईश्वर की आराधना सच्चे मन से की जाए तो प्रार्थना का संपूर्ण फल मिल सकता है. प्रार्थना के प्रभाव से आत्मा सीधे परमात्मा से जुड़ जाती है. प्रार्थना में बड़ी शक्ति होती है, लेकिन यह तभी स्वीकार होती है जब इसे करने का तरीका सही हो. सही जगह और सही स्थिति में प्रार्थना करने से इसका निश्चित लाभ मिलता है. कभी-कभी प्रार्थनाएं नाकाम हो जाती हैं, जिसका मुख्य कारण दूषित भाव, दूसरों का बुरा चाहना या आहार-व्यवहार पर नियंत्रण न होना है. एकांत स्थान पर, रीढ़ की हड्डी सीधी रखकर, शुद्ध वातावरण में अपने इष्ट देव का ध्यान करते हुए प्रार्थना करनी चाहिए. मध्य रात्रि में की गई प्रार्थना जल्दी स्वीकार होती है. प्रार्थना से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है और यह शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करती है. हालांकि, प्रार्थना का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति कर्म करना छोड़ दे, बल्कि कर्म की प्रेरणा प्रार्थना से ही मिलती है.