भगवान शिव का स्वरूप जितना सादा है, उनसे जुड़ी बातें उतनी ही रहस्यमयी हैं. सनातन परंपरा में देवाधिदेव महादेव के अलंकारों और आभूषणों का विशेष आध्यात्मिक महत्व बताया गया है. शिवजी के गले में लिपटा वासुकि नाग भय और मृत्यु पर उनके नियंत्रण को दर्शाता है. उनके हाथ में मौजूद त्रिशूल तीनों गुणों सत्, रज और तम के संतुलन का प्रतीक है, जबकि डमरू की ध्वनि से सृष्टि में चेतना और नाद का संचार होता है. मस्तक पर धारण चंद्रमा जीवन में निरंतर बदलाव का संदेश देता है, वहीं जटाओं में समाई मां गंगा लोक कल्याण के लिए शिव की अपार शक्ति को प्रदर्शित करती हैं. इसके अलावा मस्तक पर त्रिपुंड्र, शरीर पर भस्म और बाघंबर धारण करना नश्वरता से मुक्ति, वैराग्य तथा अहंकार के त्याग का ज्ञान देता है. सावन के महीने में रुद्राक्ष धारण करने और शिवजी की उपासना से साधक को आध्यात्मिक लाभ तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है.