सावन मास के शनिवार को संपत् शनिवार कहा जाता है. मान्यता के अनुसार, सावन के शनिवार को भगवान शिव और शनिदेव की संयुक्त पूजा-उपासना करने से अपार धन, समृद्धि और संपन्नता की प्राप्ति होती है. शनिदेव भगवान शिव को अपना आराध्य और गुरु मानते हैं, इसलिए सावन में शिव पूजन करने से शनि संबंधी कष्टों और साढ़ेसाती या ढैय्या के दुष्प्रभावों से शीघ्र मुक्ति मिलती है. इस दिन शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने, शिवलिंग पर जल, नीला फूल या शमी पत्र अर्पित करने, और जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र अथवा जूते दान देने से करियर तथा रोजगार में आ रही बाधाएं दूर होती हैं. सावन शनिवार के महाउपायों से आरोग्य और ऐश्वर्य का वरदान मिलता है.