हिंदू धर्मग्रंथों में मां लक्ष्मी की कृपा और धन-ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए श्री सूक्तम के पाठ को बेहद फलदायी और चमत्कारी बताया गया है। ऋग्वेद से लिए गए इस सूक्त में महात्म्य सहित कुल 16 ऋचाएं हैं, जिन्हें षोडशोपचार पूजन के समान माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, यदि कुंडली में दरिद्र योग हो, व्यापार या नौकरी में रुकावट आ रही हो अथवा शुक्र ग्रह की दशा अनुकूल न हो, तो श्री सूक्त का नियमित पाठ कष्टों को दूर करता है। इस पाठ के लिए शुक्रवार या पूर्णिमा का दिन विशेष माना गया है। पाठ करते समय शुद्धता का ध्यान रखना आवश्यक है। सफेद अथवा गुलाबी वस्त्र धारण कर, लाल या गुलाबी आसन पर बैठकर पाठ करने की सलाह दी जाती है। पाठ के दौरान मां लक्ष्मी के साथ श्री हरि की आराधना भी अनिवार्य मानी गई है। यदि संपूर्ण पाठ संभव न हो, तो स्फटिक की माला से मंत्र का 108 बार जाप करने से भी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।