सनातन परंपरा में भगवान गणेश को प्रथम पूजनीय और विघ्नहर्ता माना गया है. पौराणिक मान्यताओं और मुद्गल पुराण के अनुसार भगवान गणपति के आठ प्रमुख अवतार विभिन्न असुरों के संहार और भक्तों के कष्ट निवारण के लिए हुए. इनमें वक्रतुंड स्वरूप शत्रु बाधा को शांत करता है, जबकि एकदंत रूप की उपासना से स्मरण शक्ति और कार्यों की रुकावटें दूर होती हैं. महोदर स्वरूप ज्ञान और विद्या की प्राप्ति कराता है, वहीं गजानन स्वरूप मानसिक शांति और सात्विक विचारों का संचार करता है. धन की प्राप्ति और रुका हुआ धन वापस पाने के लिए लंबोदर स्वरूप की पूजा फलदायी मानी गई है. इसके अलावा अचानक आने वाली पारिवारिक मुसीबतों में विकट स्वरूप, घर में अन्न-धन की समृद्धि के लिए विघ्नराज और असाध्य रोगों से मुक्ति पाने के लिए धूम्रवर्ण स्वरूप की उपासना तथा विशेष मंत्र जाप करने का विधान है.