वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को माता सीता का जन्मोत्सव यानी सीता नवमी मनाई जाती है. मान्यता है कि इसी दिन पुष्य नक्षत्र में माता जानकी धरती से प्रकट हुई थीं. राम नवमी के ठीक एक महीने बाद आने वाले इस पर्व पर भगवान राम और माता सीता की एक साथ पूजा करने से अखंड सौभाग्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. नेपाल के जनकपुर और बिहार के सीतामढ़ी स्थित पुनौरा धाम को माता सीता का प्राकट्य स्थल माना जाता है. जनकपुर के भव्य मंदिर में आज भी विवाह मंडप और सवा लाख शालिग्राम स्थापित हैं, जिनके दर्शन से मुक्तिधाम जाने के समान फल मिलता है. ज्योतिष के जानकारों के अनुसार, सीता नवमी के दिन पीले वस्त्र धारण कर पीले फूल और मिष्ठान का भोग लगाने से पारिवारिक कलह और दरिद्रता दूर होती है. इसके अलावा 'ओम जानकी वल्लभाय नमः' मंत्र का जाप करने से जीवन की सभी बाधाएं समाप्त हो जाती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं