आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में तिरुमला की सात पहाड़ियों पर स्थित तिरुपति बालाजी मंदिर को कलियुग का बैकुंठ धाम माना जाता है. यहां भगवान विष्णु श्री वेंकटेश्वर के रूप में मां पद्मावती संग विराजमान हैं. इस मंदिर से जुड़े कई अद्भुत रहस्य हैं, जिनमें मूर्ति से समुद्र की लहरों की ध्वनि सुनाई देना, मूर्ति पर पसीने की बूंदें आना, बिना तेल और घी के सदियों से अखंड दीपक का जलना और भक्तों द्वारा बाल दान करने की परंपरा शामिल है. पौराणिक कथा के अनुसार, महर्षि भृगु के अपमान के बाद माता लक्ष्मी के रूठकर पृथ्वी पर आने पर भगवान विष्णु श्रीनिवास रूप में यहां आए. देवी पद्मावती से विवाह के लिए उन्होंने कुबेर से कर्ज लिया था, जिसे आज भी श्रद्धालु दान-चढ़ावे के जरिए चुकाते हैं. इसके अलावा नारद मुनि की सलाह और भगवान वराह के सौम्य रूप से जुड़ी कथाएं भी इस पावन धाम की महिमा का वर्णन करती हैं.