गुड न्यूज़ टुडे के खास कार्यक्रम 'प्रार्थना हो स्वीकार' में वरुथिनी एकादशी के महत्व, पूजा विधि और नियमों के बारे में विस्तार से बताया गया है। वैशाख मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली इस एकादशी पर भगवान विष्णु के वराह, वामन और मधुसूदन स्वरूप की पूजा की जाती है। मान्यता है कि यह व्रत अनजाने पापों से मुक्ति दिलाता है और सौभाग्य में वृद्धि कर मोक्ष की प्राप्ति करवाता है। कार्यक्रम में राजा मान्धाता की पौराणिक कथा का भी जिक्र किया गया, जिनका पैर एक भालू ने खा लिया था, लेकिन वरुथिनी एकादशी के व्रत के प्रभाव से वे रोग मुक्त हो गए। ज्योतिष के जानकारों के अनुसार, इस दिन जल, सत्तू और मौसमी फलों का दान करना अत्यंत फलदायी होता है। व्रत के दौरान कांसे के बर्तन का उपयोग, तामसिक भोजन, और गहरे रंग के कपड़े पहनने की मनाही है। उत्तम सेहत और आर्थिक संपन्नता के लिए इस दिन भगवान विष्णु को पीले वस्त्र और पीले फूल अर्पित कर नारायण स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।