ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य के लिए वट सावित्री का व्रत रखती हैं। इस दिन विशेष रूप से बरगद के पेड़ (वट वृक्ष) की पूजा की जाती है। हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार, बरगद के पेड़ में त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है। वट सावित्री व्रत के दौरान महिलाएं बरगद के पेड़ की 108 बार परिक्रमा करते हुए कच्चा सूत लपेटती हैं और सत्यवान-सावित्री की कथा सुनती हैं। मान्यता है कि सती सावित्री ने इसी व्रत के प्रभाव से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस पाए थे। इस व्रत में भगवान विष्णु की विशेष उपासना की जाती है। पूजा के लिए महिलाएं प्रातःकाल स्नान कर 16 श्रृंगार करती हैं और रोली, अक्षत, कुमकुम, धूप, दीप और मिष्ठान से वट वृक्ष की पूजा करती हैं। यह व्रत दांपत्य जीवन में सुख, शांति और संपन्नता लाता है।