दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के बॉटनी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर अरुण जगन्नाथ ने वायु और मिट्टी के प्रदूषण से निपटने के लिए भारत का पहला 'कार्बन गार्डन' विकसित किया है। प्रोफेसर जगन्नाथ के अनुसार, 'हमने इसको कार्बन गार्डन क्यों बनाया? इसमें चार चीजें है। एक तो जो आपका जैविक प्रोसेस है फोटोसिंथेसिस इसमें तो कार्बन स्टोरेज हो ही रहा है। लेकिन हर पेड़ का अलग-अलग कार्बन का कैपेसिटी अलग-अलग होता है।' करीब 2,000 वर्ग फीट में फैले इस गार्डन में 45 प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं जो पूरे साल हरे-भरे रहते हैं। यह गार्डन न केवल कार्बन डाइऑक्साइड को सोखता है, बल्कि पेड़ों की छाल पर मौजूद सूक्ष्म जीवों के जरिए जहरीली गैसों को भी कम करता है। यह मॉडल शहरी इलाकों और छोटे स्थानों के लिए एक मिनी बायोडायवर्सिटी पार्क के रूप में विकसित किया गया है ताकि दिल्ली-एनसीआर जैसे प्रदूषित क्षेत्रों में हवा की गुणवत्ता सुधारी जा सके।