ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की बाहुड़ा यात्रा यानी श्रीमंदिर वापसी यात्रा की शुरुआत हो चुकी है. गुंडिचा मंदिर में आठ दिनों के प्रवास के बाद तीनों देव अपने मुख्य मंदिर लौट रहे हैं. यात्रा के दौरान रथ मौसी मां मंदिर पर रुकते हैं, जहां 'पोड़ा पीठा' का भोग लगाया जाता है. इसके बाद दोपहर में पहंडी अनुष्ठान के जरिए रथों को खींचा जाएगा. आगे की परंपराओं में देवताओं का 'सोनाभेश' (स्वर्ण रूप) दर्शन, 'अधर पाना' रस्म और अंतिम चरण में 'नीलाद्री विजय' शामिल है, जिसमें माता लक्ष्मी को रसगुल्ला अर्पित कर मंदिर में प्रवेश की अनुमति ली जाती है. लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं. बहुड़ा यात्रा के सुरक्षा घेरे में हजारों पुलिसकर्मियों के साथ सीआरपीएफ, आरएएफ, एनएसजी कमांडो, एनडीआरएफ और फायर सर्विस की टीमें तैनात हैं. यात्रा मार्ग की निगरानी 400 से अधिक एआई सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए की जा रही है.