देशभर में गणेश उत्सव के अवसर पर इस बार पंचांग के विशेष संयोग के कारण यह पर्व दस की जगह बारह दिनों तक मनाया जा रहा है, जिसका समापन 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर होगा. मुंबई के लालबाग के राजा सहित विभिन्न पंडालों में श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति देखने को मिल रही है. इस दौरान धार्मिक विद्वानों ने भगवान गणेश के बारह स्वरूपों, प्रथम पूज्य बनने के कारणों और पूजा विधि के महत्व पर प्रकाश डाला. कार्यक्रम में अनलासुर संहार के बाद भगवान के उदर की ज्वाला शांत करने के लिए 21 दूर्वा अर्पित करने की परंपरा और शाप के कारण पूजा में तुलसी के वर्जित होने के धार्मिक संदर्भों को स्पष्ट किया गया. इसके अतिरिक्त मूषक की सवारी, विशाल उदर, एकदंत और गजानन स्वरूप के आध्यात्मिक संदेशों के साथ-साथ घर में गणेश प्रतिमा स्थापित करते समय सूंड की दिशा और बैठी मुद्रा के चयन से जुड़े नियमों की भी जानकारी दी गई.