भारत में जेन जेड (Gen Z) और जेन अल्फा (Gen Alpha) पीढ़ी के बीच शादी को लेकर सामाजिक दृष्टिकोण में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है. ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश में सिंगल महिलाओं की संख्या वर्तमान में 7 करोड़ है, जिसके जल्द ही 10 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है. आधुनिक युवा अब शादी को जीवन का अनिवार्य लक्ष्य मानने के बजाय केवल एक विकल्प के रूप में देख रहे हैं. शिक्षा, आर्थिक स्वतंत्रता और करियर ग्रोथ को प्राथमिकता देने के कारण महिलाएं अब पारंपरिक समझौतों के बजाय समानता पर आधारित रिश्तों को महत्व दे रही हैं. समाजशास्त्रियों और मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, वित्तीय अस्थिरता, कमिटमेंट का डर और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता इस बदलाव के मुख्य कारण हैं. युवा पीढ़ी अब सोलोइज्म, सेल्फ-पार्टनरशिप और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विकल्पों को अपना रही है ताकि वे व्यक्तिगत विकास और आजादी पर ध्यान केंद्रित कर सकें. हालांकि, विशेषज्ञों ने शहरी और शिक्षित मध्यम वर्ग में बढ़ते इस ट्रेंड के कारण भविष्य में अकेलेपन और बदलते पारिवारिक ढांचे से जुड़ी चुनौतियों की ओर भी संकेत किया है.