पितृपक्ष के धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व पर विशेषज्ञों ने श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और पितृ दोष निवारण के नियमों पर विस्तार से जानकारी दी है। बद्रीनाथ के ब्रह्मकपाल, गया जी और गंगा तट पर श्राद्ध कर्म के महत्व, अकाल मृत्यु पर नारायण बलि और चतुर्दशी श्राद्ध के विधान का उल्लेख किया गया है। सर्व पितृ अमावस्या, महिलाओं द्वारा श्राद्ध कर्म, ब्राह्मण भोजन और सूर्य को अर्घ्य देकर पितरों की तृप्ति से जुड़े शास्त्रीय नियमों को स्पष्ट किया गया है।