अयोध्या में रामनवमी के अवसर पर रामलला का दिव्य 'सूर्य तिलक' संपन्न हुआ. दोपहर 12 बजे के करीब, सूर्य की किरणें रामलला के मस्तक पर लगभग चार मिनट तक पड़ीं, जिसका करोड़ों श्रद्धालुओं ने सीधा प्रसारण देखा. इस आयोजन से पूर्व, रामलला का विशेष अभिषेक किया गया और उन्हें पीले वस्त्र पहनाकर 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया गया. यह उत्सव केवल अयोध्या तक ही सीमित नहीं रहा; देशभर में रामनवमी धूमधाम से मनाई गई, जिसमें पटना के महावीर मंदिर में लाखों भक्त उमड़े और श्रीनगर में 36 साल बाद रघुनाथ मंदिर के कपाट खुले. यह दिन चैत्र नवरात्र का अंतिम दिन भी था, जिस दिन सिद्धि और मोक्ष प्रदान करने वाली माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है. ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह दिन अमृत सिद्धि, सर्वार्थसिद्धि और रवियोग के संयोग के कारण विशेष महत्वपूर्ण रहा.