सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी के संयोग पर देशभर के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा. काशी विश्वनाथ, देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ, उज्जैन के महाकालेश्वर और मुजफ्फरपुर के बाबा गरीबनाथ धाम में जलाभिषेक व विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है. उज्जैन में भगवान नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए. इसके साथ ही सूर्य का अपनी सिंह राशि में गोचर हुआ. ज्योतिषीय परिचर्चा में कालसर्प दोष, राहु-केतु के प्रभाव, धार्मिक मान्यताओं और मेष से मीन तक 12 राशियों के राशिफल पर जानकारी दी गई. शास्त्र विशेषज्ञों के अनुसार शिवलिंग पर जल, दूध, पंचामृत अर्पित करने तथा 'ॐ नमः शिवाय', महामृत्युंजय मंत्र और 'ॐ नवकुलाय विद्महे' के जाप से दोष शांत होते हैं. कथाओं के अनुसार आस्तिक मुनि द्वारा सर्पों पर गौदुग्ध छिड़कने से दूध चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई थी. दूसरी ओर, आसनसोल से 301 बाल कांवड़ियों का दल बैद्यनाथ धाम रवाना हुआ और अकोला में श्रद्धालुओं ने पूर्णा नदी का जल भगवान राजराजेश्वर को अर्पित किया.