Ye Hui Na Baat | शारदीय नवरात्रि के अवसर पर आयोजित विशेष परिचर्चा में मां दुर्गा के नौ रूपों, उनके गुणों तथा साधना विधि के आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई. विशेषज्ञों ने बताया कि नवरात्रि में उपवास और अनुशासन से शरीर डिटॉक्स होता है, पाचन तंत्र सुधरता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. चर्चा में मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री के आध्यात्मिक स्वरूपों और कर्म-प्रधान संदेशों का उल्लेख हुआ. इसके साथ ही चक्र ध्यान, ग्रहों की शांति, वाणी शुद्धि, एकाग्रता और मानस पूजन के महत्व को रेखांकित किया गया. परिचर्चा में स्पष्ट किया गया कि व्रत का वास्तविक अर्थ केवल अन्न-जल त्यागना नहीं, बल्कि संकल्प, मानसिक संतुलन, अहंकार का त्याग और परमात्मा के स्मरण में स्वयं को लीन करना है.