सुप्रीम कोर्ट ने देश में बढ़ते साइबर फ्रॉड और 'डिजिटल अरेस्ट' के मामलों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सख्त रुख अपनाया है. अदालत ने ऑनलाइन ठगी को 'डकैती' करार देते हुए केंद्र सरकार से 54,000 करोड़ रुपये की ठगी पर नीतिगत स्पष्टीकरण मांगा है. साइबर विशेषज्ञ विराग गुप्ता और पवन दुग्गल के अनुसार, 2021 से 2023 के बीच 48 लाख शिकायतों के मुकाबले केवल 2 लाख एफआईआर दर्ज होना चिंताजनक है. कोर्ट ने गृह मंत्रालय को 2 जनवरी 2026 की एसओपी लागू करने, सीबीआई को मामलों की पहचान करने और आरबीआई को संदिग्ध बैंकिंग लेनदेन रोकने के निर्देश दिए हैं. विशेषज्ञों ने बैंकिंग प्रणाली की खामियों, म्यूल अकाउंट्स और डेटा सुरक्षा कानून के अभाव को ठगी का मुख्य कारण बताया है. अदालत ने विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल के लिए चार हफ्तों में एमओयू का ड्राफ्ट तैयार करने का आदेश दिया है. चर्चा में एआई के दुरुपयोग और वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा हेतु बैंकों की जवाबदेही तय करने पर जोर दिया गया है.