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Asian Games 2026: नौवीं कक्षा में थामी हॉकी स्टिक, 6 साल से भारतीय टीम का हिस्सा हैं यशदीप, एशियन गेम्स में स्वर्ण से ओलंपिक का टिकट पक्का

एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला और पुरुष हॉकी टीम के स्वर्ण पदक जीतने से हॉकी परिवार की खुशी दोगुनी हो गई. भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व कप्तान एवं प्रशिक्षक प्रीतम सिवाच के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास रही, क्योंकि उनके बेटे यशदीप सिवाच भारतीय पुरुष हॉकी टीम का हिस्सा हैं. दोनों टीमों की जीत पर उन्होंने पूरे देश को बधाई दी. एशियन गेम्स में स्वर्ण जीतने के साथ टीम ने ओलंपिक का टिकट भी हासिल कर लिया है.

हॉकी खिलाड़ी यशदीप सिवाच के परिवार में जश्न का माहौल.
gnttv.com
  • सोनीपत,
  • 04 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 12:39 PM IST

एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला और पुरुष हॉकी टीम के स्वर्ण पदक जीतने से हॉकी परिवार की खुशी दोगुनी हो गई. भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व कप्तान एवं प्रशिक्षक प्रीतम सिवाच के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास रही, क्योंकि उनके बेटे यशदीप सिवाच भारतीय पुरुष हॉकी टीम का हिस्सा हैं. दोनों टीमों की जीत पर उन्होंने पूरे देश को बधाई देते हुए कहा कि बेटियों के स्वर्ण पदक पर उन्हें बेहद खुशी हुई, वहीं बेटे की टीम के जीतने की खुशी भी अलग तरह की अनुभूति है.

...तो सोना जरूर मिलेगा
प्रीतम सिवाच ने बताया कि पुरुष टीम के मुकाबले से पहले उनकी यशदीप से बातचीत हुई थी. उन्होंने बेटे से कहा था कि सभी खिलाड़ी एकजुट होकर खेलें, तो सोना जरूर मिलेगा. भारतीय टीम के स्वर्ण पदक जीतने के बाद परिवार में उत्सव का माहौल है. उन्होंने कहा कि एशियन गेम्स में स्वर्ण जीतने के साथ टीम ने ओलंपिक का टिकट भी हासिल कर लिया है. प्रीतम सिवाच ने बताया कि यशदीप बचपन से ही हॉकी के माहौल में पले-बढ़े.

वह उनके साथ मैदान पर जाता था और बेटियों के साथ दौड़ लगाता था. इसी माहौल ने उसे खेल से जोड़ दिया. नौवीं कक्षा में पढ़ाई के दौरान उसने हॉकी स्टिक थाम ली और इसके बाद खेल को ही अपना लक्ष्य बना लिया. यशदीप का चयन राष्ट्रीय शिविर में हुआ और धीरे-धीरे वह भारतीय टीम तक पहुंचे. वह करीब छह वर्षों से भारतीय टीम का हिस्सा हैं. विश्व कप के अलावा जूनियर एशियन गेम्स और जूनियर विश्व कप जैसी प्रतियोगिताओं में भी वह देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलते हुए उन्होंने सोनीपत की खेल परंपरा को आगे बढ़ाया है.

यह जीत पूरे हॉकी जगत के लिए महत्वपूर्ण 
यशदीप के पिता कुलदीप सिवाच भी भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा रह चुके हैं. हालांकि बाद में उन्होंने खेल छोडकऱ प्रशिक्षण को अपना क्षेत्र बनाया. प्रीतम सिवाच भी भारतीय महिला टीम की कप्तानी कर चुकी हैं और प्रशिक्षक के तौर पर खिलाड़ियों को तैयार करती रही हैं. ऐसे में यशदीप का भारतीय टीम तक पहुंचना परिवार की हॉकी परंपरा की अगली कड़ी है. कुलदीप सिवाच ने कहा कि बेटे और बेटियों की जीत परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे हॉकी जगत के लिए महत्वपूर्ण है. हॉकी उनका जीवन है और इसी खेल ने परिवार को पहचान दी है.

उन्होंने कहा कि हॉकी को आगे बढ़ाने के लिए परिवार लगातार प्रयास कर रहा है. कुलदीप सिवाच ने कहा कि एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर लौटने वाले सभी खिलाड़ियों का प्रीतम सिवाच अकादमी में अभूतपूर्व स्वागत किया जाएगा. उन्होंने कहा कि भारतीय महिला और पुरुष दोनों टीमों ने शानदार प्रदर्शन किया है. अब ओलंपिक में भी दोनों टीमों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है. यशदीप की उपलब्धि से आसपास के क्षेत्र में भी खुशी का माहौल है. खेल प्रेमियों ने भारतीय टीम की जीत पर एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी मनाई. परिवार को उम्मीद है कि यशदीप आने वाले बड़े अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में भी इसी तरह प्रदर्शन करते हुए देश का नाम रोशन करेंगे.

(पवन कुमार की रिपोर्ट)

 

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