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देश के लिए जीते 4 इंटरनेशनल मेडल, लेकिन सब्जी बेचने और कैब चलाने को मजबूर ये खिलाड़ी... दरवाजे खटखटाने के बाद भी नहीं मिल रही नौकरी

देश के लिए चार इंटरनेशनल मेडल जीतने वाला खिलाड़ी, नौकरी के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहा है, लेकिन हाथ कुछ नहीं लग रहा. जिसके बाद मजबूरन उसे पिता के साथ सब्जी बेचनी पड़ रही है और कैब चलाकर परिवार का साथ देना पड़ रहा है.

थ्रो-बॉल खिलाड़ी अमरदीप
सत्यजीत कुमार
  • रांची,
  • 01 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 11:21 PM IST

झारखंड के थ्रो-बॉल खिलाड़ी अमरदीप ने देश के लिए इंटरनेशनल गोल्ड मेडल जीता है, लेकिन इसके बावजूद वे अपनी और अपने परिवार की जीविका चलाने के लिए सब्ज़ियां बेचते हैं और कैब चलाते हैं. झारखंड के 29 वर्षीय थ्रो बाल स्टार अमरदीप देश के लिए 4 गोल्ड मेडल अंतरराष्ट्रीय इवेंट्स में जीत चुके है. बावजूद इसके राज्य की स्पोर्ट्स पॉलिसी के कारण उन्हें नौकरी नहीं मिली. इसलिए पेट पालने और परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए अब वो रांची के अरगोड़ा चौक पे सब्जी बेचते है. साथ ही कैब चलाकर भी कुछ पैसे परिवार के लिए अर्जित करते है.

अन्य खिलाड़ियों को सुविधा, लेकिन उन्हें नहीं मिली नौकरी तक

उन्होंने फोन पर बातचीत में बताया कि उनके कई साथी जो छत्तीसगढ़, हरियाणा और बिहार से हैं, उन्हें सरकारी नौकरियों मिली है. हरियाणा की तरफ से खेलने वाले और अमरदीप के कप्तान रहे हरियाणा के खिलाड़ी को तमाम सुविधा वहां के सरकार दे रही है. लेकिन कैश अवार्ड और सरकारी नौकरी के लिए दिए गए उनके आवेदन केवल यूं ही पड़े हुए है. ऐसा नहीं है कि उन्होंने सिस्टम के सामने अपनी बाते नहीं रखी. इसके पहले जो स्पोर्ट्स मिनिस्टर थे अमरदीप उनसे भी वो मिल चुके है, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ.

पिता के साथ बेचते हैं सब्जी, तो भाई लगाते फूड स्ट्रॉल

अमरदीप ने बताया कि उनके परिवार में उनकी मां, पिता एवं बड़े भाई है. पिता सब्जी बेचते है और उन्हीं के काम में अमरदीप भी साथ देते हैं. मां हाउसमेकर है और लगभग 35 किलो सब्जी सर पे रखकर घर-घर बेचती है. बड़े भाई भी किसी तरह खाने पीने का यानी फास्ट फूड का स्टॉल लगाकर काम करते है. हालांकि अमरदीप ने बताया कि लगातार 2016 से वो प्रोत्साहन राशि के लिए सरकार के दरवाजे खटखटा रहे है लेकिन उसका कोई फायदा नहीं मिला.

टूर्नामेंट के लिए मलेशिया जाने के लिए परिवार ने उठाया कर्ज

अमरदीप ने बताया कि मलेशिया जाने के लिए उन्हें 65000 रुपए कर्ज लेना पड़ा था. इसमें थ्रो बाल एसोसिएशन और परिवार ने मदद की थी. झारखंड थ्रो बाल एसोसिएशन ने भी इस खर्चा का लगभग आधा भाग उठाया था.

रात में चलाते हैं कैब, फिर सुबह प्रैक्टिस

वह 2020 से नौकरी के लिए कोशिश कर रहे है लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. बीच में कोरोना आ गया. फिर 2022 से लगातार नौकरी पाने का प्रयास जारी है. अमरदीप कहते हैं कि जिंदगी में काफी मेहनत और स्ट्रगल है. रात को अगर गाड़ी चलाना पड़ा तो सुबह आकर प्रैक्टिस करना भी मुश्किल होता है लेकिन करियर के लिए वो सबकुछ मैनेज कर रहे है और उन्होंने अभी हार नहीं मानी है.

2015 में जीता पहला इंटरनेशनल गोल्ड मेडल

अक्टूबर लास्ट 2026 में श्रीलंका जाने की बात उन्होंने बताई. वहां वो एक टूर्नामेंट में हिस्सा लेंगे. उन्होंने अपना पहला इंटरनेशनल गोल्ड मेडल 2015 में मलेशिया में हुई एशियन जूनियर थ्रोबॉल चैंपियनशिप में जीता था. इसके बाद उन्होंने 2017 में काठमांडू में इंडो-नेपाल थ्रोबॉल चैंपियनशिप, 2019 में बेंगलुरु में साउथ एशियन थ्रोबॉल चैंपियनशिप और 2026 में रांची में इसके दूसरे एडिशन में भी खिताब जीते.

सरकार कर रही नौकरी के मुद्दे पर विचार

इस मुद्दे पर खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने ट्विटर हैंडल पर पोस्ट किया है. उन्होने स्पोर्ट्स विभाग को तत्काल इस मामले को संज्ञान में लेकर करवाई करने को कहा है. राज्य के स्पोर्ट्स मिनिस्टर ने सीएम के ट्वीट के बाद आजतक से फोन पर बातचीत में कहा कि सरकार ये देख रही है कि पॉलिसी के आधार पर अमरदीप को कैसे नौकरी दी जा सकती है. साथ ही रोजगार के अन्य विकल्प पे भी विचार किया जा रहा है.

 

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