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कभी लकड़ी की छड़ी से करती थीं प्रैक्टिस… अब महिला हॉकी टीम की कप्तान Salima Tete को मिलेगा Arjuna Award

काफी संघर्षों के बाद सलीमा ने सिमडेगा से भारतीय हॉकी टीम तक सफर तय किया है. उनके इस संघर्ष में उनके परिवार वालों खूब साथ दिया. इसी के बदौलत आज वे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नाम कमा रही हैं. सलीमा टेटे को हॉकी में शानदार प्रदर्शन के लिए 2019 में अपॉइंटमेंट रांची रेल डिवीजन दिया गया था. 

Salima Tete
gnttv.com
  • झारखंड ,
  • 03 जनवरी 2025,
  • अपडेटेड 12:04 PM IST
  • कभी लकड़ी की छड़ी से करती थीं प्रैक्टिस
  • अब मिलेगा अर्जुन अवॉर्ड

झारखंड के खेल प्रेमी के लिए साल का दूसरा दिन खुशियों का सौगात लेकर आया. महिला हॉकी टीम की कप्तान और ओलंपियन सलीमा टेटे को अर्जुन अवॉर्ड देने की घोषणा हुई है. दरअसल, क्रिकेट आइकॉन महेंद्र सिंह धोनी को झारखंड की आन-बान और शान कहा जाता है.

लेकिन अब इसमें एक और नाम जुड़ गया है. महिला हॉकी इंडिया की कप्तान और ओलंपियन सलीमा टेटे ने भी राज्य के गौरव में चार चांद लगा दिए हैं. लंबे संघर्ष और हॉकी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए उन्हें अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा.

झारखंड के सिमडेगा की हैं सलीमा 
सलीमा टेटे झारखंड के सिमडेगा जिले की निवासी हैं. उनका पैतृक गांव बड़की छापर है. उनके पिता का नाम सुलक्षण टेटे है और वे भी स्थानीय स्तर पर हॉकी खेलते रहे हैं. काफी संघर्षों के बाद सलीमा ने सिमडेगा से भारतीय हॉकी टीम तक सफर तय किया है. उनके इस संघर्ष में उनके परिवार वालों खूब साथ दिया.

इसी के बदौलत आज वे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नाम कमा रही हैं. सलीमा टेटे को हॉकी में शानदार प्रदर्शन के लिए 2019 में अपॉइंटमेंट रांची रेल डिवीजन दिया गया था. 

ओलंपिक के किया था शानदार प्रदर्शन
साल 2021 में ओलंपिक के दौरान शानदार प्रदर्शन के लिए रेलवे ने उन्हें आउट ऑफ टर्न प्रमोशन देकर OSD स्पोर्ट्स बना दिया है. रांची रेल डिवीजन के सीनियर डीसीएम निशांत कुमार ने बताया कि पूरे रांची रेल डिवीजन परिवार के लिए ये गौरव का क्षण है. इससे अन्य खिलाड़ियों को भी अच्छा करने की प्रेरणा मिलेगी, हॉकी को मजबूती मिलेगी और नए खिलाड़ी हॉकी के तरफ आकर्षित होंगे. 

सलीमा के माता-पिता

राज्य की पहली लड़की जिसे मिलेगा अर्जुन अवॉर्ड
हॉकी इंडिया के अध्यक्ष भोलानाथ सिंह ने भी इसपर ख़ुशी जाहिर की है. उन्होंने कहा, “सलीमा राज्य की पहली बेटी हैं जिनका चयन अर्जुन अवॉर्ड के लिए किया गया है. पूरे राज्य के लिए ये गर्व की बात है. आज उस बेटी को सम्मान मिल रहा है जो यहीं खेली और निखरकर सामने आई. साथ ही राज्य का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लेकर गई.” 

वहीं, सलीमा के पिता के मुताबिक, गांव में लकड़ी की छड़ी लेकर भी लड़कियां प्रैक्टिस करती हैं. अभी भी टैलेंट यानी प्रतिभा की यहां कोई कमी नहीं है. केवल मौके जरूरत है, जिससे इन सभी लड़कियों की प्रतिभा निखरकर सामने आएगी. 

(सत्यजीत कुमार की रिपोर्ट)


 

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