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सागर की बेटी यामिनी मौर्य का कमाल! कॉमनवेल्थ गेम्स में जीता रजत पदक

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मध्य प्रदेश के सागर की बेटी यामिनी मौर्य ने जूडो में रजत पदक जीतकर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है. उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद पूरे परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई है.

Yamini Maurya
हिमांशु पुरोहित
  • सागर ,
  • 01 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 2:59 PM IST

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मध्य प्रदेश के सागर की बेटी यामिनी मौर्य ने जूडो में रजत पदक जीतकर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है. उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद पूरे परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई है. घर पर रिश्तेदारों और शुभचिंतकों का तांता लगा हुआ है. फोन पर लगातार बधाइयों का सिलसिला जारी है. नेताओं और अधिकारियों ने भी यामिनी के पिता को फोन कर बेटी की इस सफलता पर शुभकामनाएं दी हैं. यामिनी की जीत ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मेहनत और हौसले के दम पर हर सपना पूरा किया जा सकता है.

यामिनी के पिता हरिओम मौर्य ने बताया कि जब पूरा परिवार टीवी पर मुकाबला देख रहा था, तब बेटी का पदक जीतना उनके लिए बेहद भावुक पल था. उन्होंने कहा कि उनकी आंखों में खुशी के आंसू आ गए थे. उन्होंने बताया कि परिवार ने आर्थिक और अन्य कई तरह की मुश्किलों का सामना किया, लेकिन मध्य प्रदेश सरकार और कोच का हमेशा सहयोग मिला. इसी समर्थन और यामिनी की मेहनत ने आज यह मुकाम दिलाया.

यामिनी की मां मिथिलेश मौर्य ने बताया कि उनकी बेटी ने सागर से ही जूडो की शुरुआत की थी. बेहतर प्रदर्शन के बाद वह भोपाल, फिर पटियाला और बाद में कर्नाटक में प्रशिक्षण लेने गई. उन्होंने कहा कि यामिनी जहां भी प्रतियोगिता खेलने जाती थी, वहां से अक्सर स्वर्ण पदक जीतकर लौटती थी. कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक जीतते समय पूरा परिवार भावुक भी था और गर्व भी महसूस कर रहा था.

18 साल की मेहनत और संघर्ष का मिला इनाम
सागर की पुरानी सदर निवासी यामिनी मौर्य ने महिलाओं के 57 किलोग्राम भार वर्ग में रजत पदक जीता है. वह पिछले 18 वर्षों से जूडो में लगातार मेहनत कर रही हैं और अब तक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 26 से अधिक स्वर्ण पदक अपने नाम कर चुकी हैं. उनके पिता छोटे किसान होने के साथ-साथ बीमा एजेंट भी हैं. यामिनी की तीन बहनें और एक भाई हैं. स्कूल के दिनों में उन्होंने जूडो शुरू किया था और केवल तीन महीने में ही स्टेट चैंपियन बनकर पहला स्वर्ण पदक जीत लिया था.

पैर टूटने के बाद भी नहीं मानी हार
यामिनी का सफर आसान नहीं रहा. साल 2017 में एक प्रतियोगिता के दौरान उनका पैर टूट गया था. ऑपरेशन के बाद उन्हें करीब एक साल तक खेल से दूर रहना पड़ा. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. चोट से उबरने के बाद दोबारा अभ्यास शुरू किया और लगातार चार वर्षों तक कड़ी मेहनत की. उनकी इसी लगन और आत्मविश्वास का नतीजा है कि आज उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में रजत पदक जीतकर सफलता की नई मिसाल कायम कर दी.

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