टी-20 हो या वनडे मैच... इस समय अधिकतर मुकाबलों में बल्लेबाज चौके-छक्कों की बारिश कर रनों का अंबार लगा दे रहे हैं. गेंदबाज असहाय नजर आ रहे हैं. पहले जहां टी-20 मैच में 180 से लेकर 200 तक रन जीत के लिए सेफ माना जाता था, वहीं आज 200+ रन का लक्ष्य भी आसानी से चेज हो जा रहा है. उधर, वनडे की बात करें तो पहले जहां 270 से 300 तक रन जीत के लिए सेफ माना जाता था, वहीं आज 300+ रन का लक्ष्य भी आसानी से चेज हो जा रहा है. गुरुवार को खेले गए टी-20 मैच में भारत ने न्यूजीलैंड के खिलाफ 226 रनों के लक्ष्य को भी सफलतापूर्वक हासिल कर लिया. उधर, 22 अक्टूबर को खेले गए श्रीलंका-इंग्लैंड वनडे मैच में श्रीलंका की टीम ने 429 रनों के लक्ष्य को भी हासिल कर लिया. अब ऐसे में सवाल उठ रहे हैं आखिर इतने रन कैसे बन रहे हैं, क्या गेंदबाजों में वह पहले वाली बात नहीं रह गई? आज हम आपको इन सवालों के जवाब बता रहे हैं.
भारत ने 226 रनों का लक्ष्य किया हासिल
आपको मालूम हो कि भारत और न्यूजीलैंड के बीच 5 मैचों की टी-20 सीरीज का पहला मुकाबला क्राइस्टचर्च के हेगले ओवल मैदान पर गुरुवार को खेला गया. इस मैच में भारतीय टीम ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला लिया था. पहले बल्लेबाजी करने उतरी न्यूजीलैंड की टीम ने 20 ओवर में 4 विकेट खोकर 225 रन बनाए थे. इस तरह से भारत को जीत के लिए 226 रनों का लक्ष्य दिया था. टीम इंडिया ने 19.4 ओवर में 6 विकेट के नुकसान पर 230 रन बनाकर मैच अपने नाम कर लिया. इस मैच में संजू सैमसन शानदार बल्लेबाजी करते हुए 33 गेंदों में 67 रन बनाए.
श्रीलंका की टीम ने 430 रन बनाकर जीत की हासिल
श्रीलंका ने त्रिकोणीय सीरीज के मुकाबले में गुरुवार को इंग्लैंड को दो विकेट से हराया. इस मैच में इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए कप्तान हैरी ब्रूक के दोहरे शतक की मदद से 50 ओवर में 4 विकेट पर 429 रन बनाए थे. इसके जवाब में पवन रत्नानायके, अविष्का फर्नांडो, दासुन शनाका और जनिथ लियानागे की दमदार बल्लेबाजी से श्रीलंका ने 49.5 ओवर में 8 विकेट पर 430 रन बनाकर मैच अपने नाम कर लिया. श्रीलंका ने इस तरह वनडे क्रिकेट के इतिहास का दूसरा बड़ा रन चेज किया.
अभी के क्रिकेट मैच में आखिर कैसे बन रहे इतने ज्यादा रन
अब सवाल है कि अभी के क्रिकेट मैच में आखिर कैसे इतने ज्यादा रन बन रहे हैं. दरअसल, आधुनिक क्रिकेट में इतने अधिक रन बनने के पीछे सिर्फ गेंदबाजों की कमी नहीं, बल्कि खेल के नियमों में बदलाव, पिचों का स्वभाव और बल्लेबाजी की शैली में आए बड़े बदलाव हैं. छोटे मैदान में बल्लेबाज तूफानी बल्लेबाजी कर चौके और छक्कों की बारिश कर रनों का अंबार लगा दे रहे हैं. उधर, गेंदबाज विकेट के लिए तरसते दिख रहे हैं.
सपाट और हाई-स्कोरिंग पिचें
आजकल अधिकतर पिचों को इस तरह तैयार किया जाता है, जिन पर गेंद बल्ले पर बहुत अच्छे से आती है. बाउंड्री छोटी रखी जाती है, जिससे मामूली हिट भी चौके और छक्के में बदल जाते हैं.
बल्लेबाजों का आक्रामक रवैया
पहले जहां बल्लेबाज शुरू में संभलकर खेलते थे. एक-दो रन लेते थे. चौके-छक्के लगाने की जगह विकेट बचाने पर जोर देते थे, वहीं आज के समय में बल्लेबाज अब सेट होने में समय नहीं लगाते. वे पहली ही गेंद से बड़े शॉट्स खेलने की रणनीति अपनाते हैं. इससे बल्लबेजा पावरप्ले और डेथ ओवरों में ताबड़तोड़ रन बनते हैं. गेंदबाजों को समझ में नहीं आता है कि आखिर कैसी गेंद फेंके.
बदले हुए नियम और फ्री-हिट
छोटे फॉर्मेट जैसे ट-20 और वनडे मैच में फील्डिंग पर पाबंदियां (जैसे सर्कल के बाहर कम फील्डर होना), नो-बॉल पर फ्री-हिट और डीआरएस जैसी सुविधाओं से बल्लेबाजों को खुलकर शॉट खेलने का पूरा फायदा मिलता है. बदले हुए नियम और फ्री-हिट से गेंदबाजों की शामत आ जा रही है.
आईपीएल, टी-20 लीग्स और अभ्यास
आईपीएल और अन्य टी-20 लीग्स ने युवा बल्लेबाजों का डर पूरी तरह खत्म कर दिया है. नए और युवा बल्लेबाज भी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजों के खिलाफ निडर होकर रिवर्स स्वीप और स्कूप जैसे शॉट खेलते हैं. पहले गेंदबाजों का हौवा रहता था. कपिल देव, श्रीनाथ, अनिल कुंबले, शोएब अख्तर, वकार यूनिस, वसीम अकरम, ग्लैन मैक्ग्रा, ब्रेट ली, लसित मलिंगा का नाम सुनकर ही बल्लेबाज डर जाते थे. आज के समय ऐसा नहीं है. नए बल्लेबाज भी गेंदबाजों की खूब धुनाई कर रहे हैं. आज के बल्लेबाज अभ्यास भी अधिकतर चौके और छक्के मारने को लेकर कर रहे हैं.
गेंदबाजों पर दबाव
आधुनिक क्रिकेट में इम्पैक्ट प्लेयर नियम और छोटे प्रारूप ने गेंदबाजों का मार्जिन (गलती की गुंजाइश) लगभग शून्य कर दिया है. हल्की सी लाइन-लेंथ चूकने पर गेंद सीधा स्टैंड्स में जाती है. कुल मिलाकर ऐसा नहीं है कि गेंदबाजों में प्रतिभा या कौशल खत्म हो गया है, बल्कि परिस्थितियां, नियम और बल्लेबाजी का स्तर पूरी तरह बल्लेबाजों के पक्ष में झुक गया है.