अलवर पुलिस ने एक ऐसे इंटरनेशनल साइबर ठग को गिरफ्तार किया है, जिसने महज पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई की, लेकिन देश के कई राज्यों में साइबर ठगी का ऐसा नेटवर्क खड़ा कर लिया कि पुलिस भी उसकी परतें खोलते-खोलते हैरान रह गई. 20 वर्षीय शौकीन ने करीब 24 लोगों की गैंग तैयार कर रखी थी, जो फर्जी सिम कार्ड, म्यूल बैंक खाते और ऑनलाइन ठगी के पूरे नेटवर्क को संचालित करती थी.
पुलिस जांच में सामने आया कि पांच साल पहले तक आर्थिक तंगी में जीवन बिताने वाला आरोपी अब करोड़ों की संपत्ति का मालिक बन चुका है. साइबर ठगी की कमाई से उसने कार, मकान और कृषि भूमि तक खरीद ली. पुलिस ने उसके कब्जे से बरामद सफेद ब्रेजा कार को भी जब्त किया है, जिसे साइबर ठगी की रकम से खरीदा जाना माना जा रहा है.
ऐसे चलता था ठगी का पूरा नेटवर्क
पुलिस के अनुसार आरोपी सोशल मीडिया पर मेडिकल इमरजेंसी का झांसा देकर लोगों से पैसे ट्रांसफर करवाता था. इसके अलावा महिलाओं के सस्ते सूट-सलवार बेचने के फर्जी विज्ञापन और वीडियो पोस्ट कर खुद को कपड़ा फैक्ट्री का मालिक बताकर लोगों को ठगता था. ठगी की रकम म्यूल खातों में मंगवाई जाती थी और फर्जी सिम कार्डों के जरिए पूरे नेटवर्क को संचालित किया जाता था. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी अपने नाम से न मोबाइल खरीदता था और न ही सिम लेता था. उसके पास से बरामद मोबाइल, सिम कार्ड और मोबाइल बिल भी दूसरे लोगों के नाम पर मिले हैं. पुलिस को आशंका है कि पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों से फर्जी सिम उपलब्ध कराने वाला बड़ा नेटवर्क भी इसके पीछे सक्रिय है.
पहले भी दर्ज थे मुकदमे, लेकिन नहीं खुला था राज
शौकीन के खिलाफ दो साल पहले मालाखेड़ा थाने में साइबर ठगी का मामला दर्ज हुआ था, लेकिन उस समय जांच ज्यादा आगे नहीं बढ़ सकी. बाद में चंडीगढ़ में दर्ज साइबर ठगी के मामले के दौरान उसके नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हुईं. जांच में सामने आया कि वह कई राज्यों में संगठित तरीके से साइबर अपराध कर रहा था और फर्जी सिम तथा म्यूल खाते उपलब्ध कराने का भी काम करता था.
जम्मू-कश्मीर से राजस्थान तक फैला नेटवर्क
पुलिस के अनुसार आरोपी जम्मू-कश्मीर, पंजाब, मध्यप्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों के लोगों को साइबर ठगी का शिकार बना चुका है. अब उसके अन्य साथियों की तलाश में विशेष टीम बनाई गई है और पूरे नेटवर्क की जांच जारी है.
एसपी बोले-15 अगस्त से पहले बड़े साइबर अपराधी सलाखों के पीछे होंगे
पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी ने कहा कि अलवर पुलिस का लक्ष्य 15 अगस्त से पहले जिले के सभी बड़े साइबर अपराधियों को गिरफ्तार करना और साइबर ठगी से अर्जित उनकी संपत्ति की पहचान कर जब्ती की कार्रवाई करना है. उन्होंने बताया कि लगातार कार्रवाई के चलते साइबर अपराध के मामले में पहले शीर्ष हॉटस्पॉट रहे अलवर जिले की रैंकिंग अब आठवें स्थान पर आ गई है.
39 साइबर अपराधी गिरफ्तार
राजस्थान पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर 20 जुलाई से 4 अगस्त तक चले विशेष अभियान में अलवर पुलिस ने साइबर अपराधियों पर बड़ा शिकंजा कसते हुए 33 साइबर प्रकरण दर्ज किए और 39 आरोपियों को गिरफ्तार किया. जिले के 191 साइबर हॉटस्पॉट चिन्हित किए गए, जिनमें से 177 स्थानों पर दबिश दी गई. पुलिस ने 37.67 लाख रुपये की ठगी की राशि होल्ड कराई, जबकि 6.55 लाख रुपये पीड़ितों को वापस भी दिलवाए.
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