आम आदमी तो छोड़ों मंत्री को भी निशाना बना रहे साइबर ठग, केरल के MLA को डिजिटल अरेस्ट की धमकी दी, ऐसे पकड़ी गई ठगी

ठगों ने दावा किया कि तिरुवनचूर के आधार कार्ड का इस्तेमाल कर मुंबई से एक सिम कार्ड लिया गया, जिससे बड़ा फ्रॉड किया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में मुंबई पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है.

Digital arrest scam
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 30 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:20 AM IST
  • मुंबई पुलिस बनकर आया WhatsApp वीडियो कॉल
  • डिजिटल अरेस्ट से बाल-बाल बचे मंत्री

देश में साइबर ठगों का जाल इतना फैल चुका है कि अब आम आदमी ही नहीं, बल्कि वीआईपी और मंत्री भी इनके निशाने पर हैं. केरल के पूर्व गृह मंत्री और कांग्रेस विधायक तिरुवनचूर राधाकृष्णन हाल ही में डिजिटल अरेस्ट स्कैम का शिकार होते-होते बच गए. हालांकि, उनकी सतर्कता के चलते ठगों की चाल बेनकाब हो गई.

मुंबई पुलिस बनकर आया WhatsApp वीडियो कॉल
घटना बुधवार दोपहर करीब 1:30 बजे की है. राधाकृष्णन हॉस्टल में खाना खा रहे थे, तभी उनके मोबाइल पर WhatsApp वीडियो कॉल आया. कॉल करने वालों ने खुद को मुंबई पुलिस का अधिकारी बताया. ठगों ने दावा किया कि तिरुवनचूर के आधार कार्ड का इस्तेमाल कर मुंबई से एक सिम कार्ड लिया गया, जिससे बड़ा फ्रॉड किया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में मुंबई पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है.

पहली कॉल काटी तो ठगों ने दी अरेस्ट की धमकी
संदेह होने पर तिरुवनचूर ने पहली कॉल काट दी लेकिन इसके कुछ ही देर बाद ठगों ने दोबारा WhatsApp वीडियो कॉल किया और इस बार सीधे कहा कि उन्हें गिरफ्तार किया जा रहा है. पूर्व गृह मंत्री ने तुरंत स्थिति को समझ लिया. उन्होंने ठगों से कहा कि वे केरल पुलिस से संपर्क करें, सभी दस्तावेज वहीं दिखा दिए जाएंगे. इतना कहकर उन्होंने कॉल काट दी.

FIR नंबर पूछते ही खुल गई पोल
तिरुवनचूर राधाकृष्णन ने बताया कि कॉल करने वाले हिंदी और अंग्रेजी के मिश्रण में बात कर रहे थे. जब उन्होंने एफआईआर नंबर पूछा तो जो नंबर दिया गया, वह किसी भी असली केस से मेल नहीं खाता था. वो समझ गए कि ये साइबर ठगी है. घटना के बाद उन्होंने शिकायत दर्ज कराई ताकि आम लोग इस तरह के स्कैम का शिकार न हों. पुलिस ने जांच शुरू कर दी है.

क्या है डिजिटल अरेस्ट स्कैम?
डिजिटल अरेस्ट स्कैम में ठग खुद को पुलिस, CBI, ED या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करते हैं. वे आधार, बैंक अकाउंट या किसी पार्सल/सिम कार्ड से जुड़े फर्जी अपराध का डर दिखाकर पीड़ित से पैसे या निजी जानकारी ऐंठने की कोशिश करते हैं.

डिजिटल अरेस्ट से कैसे बचें?

  • पुलिस या जांच एजेंसी WhatsApp वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती.

  • किसी भी कॉल पर आधार, बैंक, OTP या निजी जानकारी शेयर न करें.

  • एफआईआर या केस नंबर मांगे और उसे तुरंत वेरिफाई करें.

  • डराने या जल्दबाजी में फैसला कराने वाली कॉल को तुरंत काट दें.

  • संदिग्ध कॉल की सूचना 1930 हेल्पलाइन या cybercrime.gov.in पर दें.

 

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