मोबाइल फोन पर अचानक एक मैसेज आता है- 'आपका बिजली बिल अपडेट नहीं है, आज रात बिजली कनेक्शन काट दिया जाएगा.' या फिर- 'आपके वाहन का ट्रैफिक चालान पेंडिंग है, तुरंत भुगतान करें, वरना कानूनी कार्रवाई होगी,' मैसेज देखने के बाद स्वाभाविक है कि व्यक्ति घबरा जाए और बिना ज्यादा जांच-पड़ताल किए उसमें दिए लिंक पर क्लिक कर दे. यही जल्दबाजी आज साइबर अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार बनती जा रही है. साइबर ठग अब सिर्फ बैंक अधिकारी या पुलिस बनकर ही लोगों को निशाना नहीं बना रहे, बल्कि बिजली विभाग, ट्रैफिक पुलिस, RTO और सरकारी एजेंसियों के नाम का इस्तेमाल कर फर्जी मैसेज भेज रहे हैं. इन संदेशों में ऐसा माहौल बनाया जाता है कि सामने वाले के पास सोचने या सत्यापन करने का समय ही नहीं है. बिजली कनेक्शन काटने का डर दिखाकर ठगी.
Indian Cyber Crime Coordination Centre यानी I4C ने खुद अनपेड इलेक्ट्रिसिटी बिल के नाम पर भेजे जाने वाले फर्जी SMS को लेकर चेतावनी जारी की है. I4C के मुताबिक साइबर अपराधी बिजली बिल बकाया होने का दावा करते हुए SMS भेजते हैं और लोगों को लिंक पर क्लिक करने या किसी नंबर पर संपर्क करने के लिए उकसाते हैं. इसे साइबर अपराध की भाषा में smishing यानी SMS के जरिए phishing का तरीका कहा जाता है. ऐसे मैसेज में अक्सर लिखा होता है कि अगर तत्काल भुगतान नहीं किया गया तो बिजली कनेक्शन काट दिया जाएगा. कई बार मैसेज में एक मोबाइल नंबर दिया जाता है और ग्राहक से कहा जाता है कि वह तुरंत उस नंबर पर संपर्क करे।इसके बाद ठग खुद को बिजली विभाग का कर्मचारी बताकर बात कर सकता है. वह उपभोक्ता को किसी वेबसाइट पर जाने, कोई ऐप डाउनलोड करने या बैंकिंग संबंधी जानकारी देने के लिए कह सकता है. I4C ने स्पष्ट सलाह दी है कि ऐसे संदिग्ध SMS के लिंक पर क्लिक न करें और अनजान स्रोत से कोई सॉफ्टवेयर डाउनलोड न करें. साथ ही ऐसे मैसेज में मांगी गई निजी या वित्तीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए. बिजली KYC स्कैम पहले भी आ चुका है सामने.
बिजली बिल के नाम पर होने वाले साइबर फ्रॉड को लेकर सरकार पहले भी कार्रवाई कर चुकी है. जून 2024 में Department of Telecommunications ने Electricity KYC Update Scam के खिलाफ कार्रवाई की थी. सरकार के मुताबिक ठग SMS और WhatsApp के जरिए बिजली KYC अपडेट कराने के नाम पर लोगों को निशाना बना रहे थे. कुछ मामलों में पीड़ितों को malicious APK files भेजी गईं, जिन्हें डाउनलोड करने के बाद मोबाइल और वित्तीय जानकारी खतरे में पड़ सकती थी. DoT के मुताबिक इस अभियान में इस्तेमाल किए जा रहे संदिग्ध मोबाइल नंबरों और हैंडसेट की पहचान की गई और कार्रवाई की गई. यानी बिजली बिल का मैसेज अगर बिल्कुल असली दिखाई भी दे रहा हो, तब भी केवल SMS या WhatsApp पर भरोसा करना सुरक्षित नहीं है.
अब ट्रैफिक चालान के नाम पर नया जाल-
साइबर अपराधियों का दूसरा बड़ा हथियार है-फर्जी e-Challan मैसेज. मान लीजिए किसी व्यक्ति को WhatsApp पर मैसेज आता है कि उसके वाहन का चालान कट गया है. साथ में वाहन नंबर, चालान नंबर और जुर्माने की राशि जैसी जानकारी दी जाती है. इससे मैसेज बिल्कुल सरकारी प्रतीत हो सकता है. इसके बाद ठग व्यक्ति को भुगतान करने के लिए लिंक या कोई APK फाइल भेज सकता है. I4C की जनवरी 2026 की साइबर सुरक्षा सामग्री में फर्जी RTO e-Challan APK को लेकर चेतावनी दी गई है. इसमें बताया गया कि WhatsApp के जरिए 'RTO e-Challan' या 'VAHAN PARIVAHAN' जैसे नाम वाली APK फाइल भेजी जा सकती है. ऐसी malicious application फोन तक अनधिकृत पहुंच हासिल करने और निजी तथा वित्तीय जानकारी को खतरे में डालने में इस्तेमाल हो सकती है. यही वजह है कि किसी भी चालान की जानकारी WhatsApp या SMS में आए लिंक से नहीं, बल्कि आधिकारिक सरकारी माध्यम से ही verify करनी चाहिए.
APK फाइल सबसे बड़ा खतरा क्यों?
साइबर ठगों का तरीका लगातार बदल रहा है. पहले वे सिर्फ फर्जी लिंक भेजते थे. अब कई मामलों में सीधे मोबाइल ऐप यानी APK file भेजी जाती है. उदाहरण के लिए संदेश में लिखा हो सकता है- 'आपका e-Challan डाउनलोड करें' 'अपना Electricity Bill अपडेट करें' 'KYC तुरंत पूरा करें' और साथ में एक APK फाइल. एक बार व्यक्ति अनजान स्रोत से ऐप इंस्टॉल कर देता है तो वह अपने फोन को ऐसी permissions दे सकता है, जिनका इस्तेमाल संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाने के लिए किया जा सकता है. National Informatics Centre ने जुलाई 2026 की साइबर सुरक्षा सलाह में साफ कहा कि SMS, WhatsApp, ईमेल या सोशल मीडिया के जरिए आए unknown APK links से ऐप इंस्टॉल नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसी फाइलें व्यक्तिगत, वित्तीय और बैंकिंग जानकारी चुरा सकती हैं. दिल्ली सरकार की साइबर सुरक्षा सामग्री भी चेतावनी देती है कि malicious APK बैंकिंग ऐप्स को निशाना बना सकते हैं और वित्तीय डेटा चोरी कर सकते हैं.
ठग सबसे पहले डर क्यों पैदा करते हैं?
इस पूरे साइबर फ्रॉड मॉडल में सबसे महत्वपूर्ण चीज तकनीक नहीं बल्कि मानसिक दबाव है. साइबर अपराधी जानते हैं कि अगर किसी व्यक्ति को सोचने का समय मिल गया तो वह मैसेज की सत्यता जांच सकता है. इसलिए संदेश में urgency पैदा की जाती है. जैसे-
OTP मांगा तो समझिए खतरे की घंटी-
अगर कोई व्यक्ति फोन पर खुद को बिजली विभाग, बैंक, पुलिस या किसी सरकारी एजेंसी का कर्मचारी बताकर OTP, PIN, password, CVV या बैंक की गोपनीय जानकारी मांगता है तो बेहद सतर्क हो जाएं. Reserve Bank of India लगातार ग्राहकों को चेताता रहा है कि OTP, PIN और कार्ड संबंधी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए. RBI के अनुसार बैंक या RBI इस तरह SMS, ईमेल या फोन कॉल के जरिए ग्राहकों से OTP, PIN या बैंकिंग विवरण मांगने का तरीका नहीं अपनाते. इसलिए कोई व्यक्ति कितना भी भरोसेमंद लगे, अगर वह OTP बताने के लिए कह रहा है तो रुक जाइए.
सिर्फ लिंक ही नहीं, फर्जी वेबसाइट भी असली जैसी दिख सकती है.
आजकल साइबर ठग सिर्फ लिंक नहीं भेजते, बल्कि ऐसी वेबसाइट तैयार कर लेते हैं जो देखने में सरकारी पोर्टल जैसी लग सकती है. वेबसाइट पर सरकारी लोगो, विभाग का नाम, चालान नंबर, वाहन नंबर और भुगतान का विकल्प तक मौजूद हो सकता है. यही कारण है कि सिर्फ वेबसाइट का डिजाइन देखकर भरोसा नहीं करना चाहिए. किसी भी बिल या चालान को SMS में दिए गए लिंक से नहीं, बल्कि खुद आधिकारिक वेबसाइट या संबंधित विभाग के आधिकारिक ऐप को खोलकर जांचें.
अगर मैसेज आए तो क्या करें?
सबसे पहला नियम है- घबराएं नहीं. अगर बिजली बिल का मैसेज आया है तो अपने बिजली वितरण निगम की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप खोलकर बिल की स्थिति जांचें. अगर ट्रैफिक चालान का संदेश आया है तो सरकारी e-Challan सिस्टम या संबंधित आधिकारिक माध्यम से वाहन नंबर डालकर जानकारी सत्यापित करें. अगर मैसेज में कोई APK फाइल है तो उसे बिल्कुल डाउनलोड या इंस्टॉल न करें. अगर फोन पर कोई व्यक्ति कॉल करके दबाव बना रहा है तो बातचीत समाप्त करें और विभाग के आधिकारिक नंबर से खुद संपर्क करें.
गलती से लिंक क्लिक हो गया तो?
अगर आपने संदिग्ध लिंक पर क्लिक कर दिया है तो तुरंत आगे की प्रक्रिया रोक दें. अगर कोई APK या संदिग्ध ऐप इंस्टॉल कर दिया है तो इंटरनेट कनेक्शन बंद करना, संदिग्ध ऐप को हटाना और महत्वपूर्ण खातों की सुरक्षा जांचना जरूरी हो सकता है. NIC की सलाह के अनुसार संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में डिवाइस को इंटरनेट से डिस्कनेक्ट करना और महत्वपूर्ण अकाउंट्स के पासवर्ड बदलना मददगार कदम है. अगर बैंक खाते से पैसा निकल गया है तो समय बर्बाद न करें.
1930 पर तुरंत कॉल करें-
भारत सरकार के National Cyber Crime Reporting Portal के मुताबिक financial cyber fraud की स्थिति में 1930 पर तुरंत कॉल किया जा सकता है. यह हेल्पलाइन 24x7 उपलब्ध है. शिकायत National Cyber Crime Reporting Portal के जरिए भी दर्ज की जा सकती है. I4C भी नागरिकों को साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 या cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करने की सलाह देता है. यहां सबसे महत्वपूर्ण बात समय है. पैसे निकलने के बाद जितनी जल्दी शिकायत की जाएगी, उतनी जल्दी संबंधित सिस्टम में कार्रवाई शुरू होने की संभावना रहती है.
संदिग्ध SMS या WhatsApp को भी रिपोर्ट कर सकते हैं-
हर संदिग्ध संदेश के बाद ठगी होने का इंतजार करना जरूरी नहीं है. सरकार के Sanchar Saathi के Chakshu प्लेटफॉर्म पर नागरिक संदिग्ध fraud communication की रिपोर्ट कर सकते हैं. इसमें SMS, WhatsApp और कॉल के जरिए आने वाले संदिग्ध संचार की रिपोर्ट की जा सकती है. जुलाई 2026 में सरकार ने बताया कि नागरिकों की रिपोर्ट के आधार पर Chakshu के जरिए संदिग्ध fraud communications के खिलाफ कार्रवाई की गई है.
ये भी पढ़ें: