उत्तरप्रदेश के नोएडा के गौतमबुद्धनगर कमिश्नरेट पुलिस ने एक ई-चालान से जुड़े साइबर फ्रॉड मामले की जांच शुरू की है. इस प्रकरण में WinGo नामक अर्निंग ऐप की भूमिका संदिग्ध पाई गई है. प्रारंभिक जांच में यह ऐप एक संगठित साइबर ठगी नेटवर्क का हिस्सा प्रतीत हो रहा है, जो Telecom Mule as a Service के रूप में काम करता है.
आसान कमाई का लालच, फिर साइबर ठगी का जाल
पुलिस जांच में सामने आया है कि WinGo ऐप आम लोगों को आसान और तुरंत कमाई का झांसा देकर अपने जाल में फंसाता है. शुरुआत में भरोसा जीतने के लिए यूजर्स को छोटे-छोटे टास्क दिए जाते हैं और उनका भुगतान भी तुरंत कर दिया जाता है. इन टास्क में SMS भेजना या मैसेज से जुड़े काम शामिल होते हैं.
Google Store पर उपलब्ध नहीं है App
हालांकि, कुछ समय बाद यही ऐप यूजर के मोबाइल से रोजाना 80 से 100 SMS अपने आप भेजने लगता है, जिनका संबंध विभिन्न प्रकार की साइबर धोखाधड़ी से पाया गया है. चौंकाने वाली बात यह है कि यह ऐप Google App Store पर उपलब्ध नहीं है, बल्कि थर्ड पार्टी लिंक के जरिए इंस्टॉल कराया जाता है.
अनजाने में बन रहे हैं साइबर अपराध का हिस्सा
जांच अधिकारियों के अनुसार, ये SMS टास्क देखने में सामान्य लगते हैं, लेकिन असल में इनके जरिए स्कैम किए जाते हैं. अधिकांश यूजर्स को यह अंदाजा भी नहीं होता कि उनके मोबाइल नंबर और डिजिटल पहचान का इस्तेमाल बड़े साइबर अपराध को अंजाम देने में हो रहा है.
पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि Telegram चैनलों के माध्यम से WinGo ऐप से जुड़े एक लाख से ज्यादा यूजर्स होने का दावा किया जा रहा है. इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में लोग अनजाने में साइबर ठगी की चेन का हिस्सा बन चुके हैं.
कमजोर वर्ग को बनाया जा रहा निशाना
पुलिस का कहना है कि साइबर ठग खासतौर पर भोले-भाले और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निशाना बना रहे हैं. शुरुआती मुनाफे का लालच देकर उन्हें स्कैम नेटवर्क में फंसा लिया जाता है और बाद में उनकी डिजिटल गतिविधियों का इस्तेमाल धोखाधड़ी को छिपाने के लिए किया जाता है.
पुलिस की अपील, ऐसे ऐप्स से रहें दूर
गौतमबुद्धनगर पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि बिना मेहनत ज्यादा कमाई, SMS टास्क, मैसेज फॉरवर्डिंग, रेफरल बेस्ड या डिपॉजिट मांगने वाले किसी भी ऐप से दूरी बनाए रखें.
बिना लाइसेंस गारंटीड रिटर्न देने वाले ऐप्स से सावधान रहें.
किसी भी संदिग्ध ऐप या कमाई के ऑफर की जानकारी तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल या नजदीकी पुलिस थाने में दें.
इनपुट-अरविंद ओझा