क्या हो अगर आपको रोज ऑफिस आना तो पड़े, लेकिन आने-जाने, खाने-पीने और छोटी-मोटी जरूरतों का पूरा खर्च आपकी जेब से न निकलकर कंपनी उठाए? सुनने में यह किसी सपने जैसा लगता है, लेकिन अमेरिका की एक स्टार्टअप कंपनी ने ऐसा ही मॉडल अपनाकर सोशल मीडिया पर बड़ी बहस छेड़ दी है. सैन फ्रांसिस्को स्थित टेक कंपनी की को-फाउंडर Amanda Zhu ने लिंक्डइन पर एक पोस्ट में बताया कि उनकी कंपनी कर्मचारियों को हफ्ते में 5 दिन ऑफिस बुलाती है, लेकिन इसके लिए आने-जाने और खाने-पीने जैसे कई खर्च कंपनी खुद उठाती है.
फाउंडर ने क्या कहा
अमांडा झू ने अपने पोस्ट में लिखा कि सैन फ्रांसिस्को में पेट्रोल की कीमत लगभग 6 से 7 डॉलर प्रति गैलन है. ऐसे में रोज ऑफिस आने-जाने का खर्च कर्मचारियों पर भारी पड़ता है. उन्होंने कहा, 'हम चाहते हैं कि टीम 5 दिन ऑफिस आए, इसलिए उनके गैस खर्च कंपनी कार्ड से दिए जाते हैं.' उनका यह भी कहना था कि कंपनी का फोकस है कि सभी लोग बाहरी परेशानियों से फ्री होकर सिर्फ काम पर ध्यान दें.
कर्मचारियों को क्या-क्या सुविधा
पोस्ट के अनुसार कंपनी अपने कर्मचारियों को एक कार्ड देती है, जिससे वे कई तरह के खर्च कर सकते हैं. इनमें शामिल हैं-
पेट्रोल और गाड़ी का खर्च
पार्किंग फीस
Waymo जैसी राइड सर्विस
सुबह का नाश्ता और लंच
डिनर और स्नैक्स
कुल मिलाकर कंपनी का दावा है कि वह कर्मचारियों को ऑफिस आने से जुड़ी लगभग सभी जरूरतों में आर्थिक मदद देती है ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो.
सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया
जैसे ही यह पोस्ट वायरल हुई, सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग राय सामने आई. कुछ लोगों ने इस पहल की तारीफ की और कहा कि यह कर्मचारियों के प्रति एक फॉरवर्ड थिंकिंग अप्रोच है, क्योंकि आमतौर पर ऑफिस आने का खर्च कर्मचारी खुद उठाते हैं, जो एक तरह का छिपा हुआ आर्थिक बोझ है. वहीं ई लोगों ने इस मॉडल की आलोचना भी की. एक यूजर ने लिखा कि चाहे कंपनी कितना भी खर्च दे दे, लेकिन रोज का लंबा ट्रैफिक और 2-3 घंटे की तका देने वाले ट्रैवल टाइम की भरपाई नहीं कर सकता. उनके अनुसार, यह समय कर्मचारियों के परिवार और निजी जीवन से जुड़ा होता है, जिसे पैसे से नहीं बदला जा सकता.
हाइब्रिड वर्क लोगों की पहली पसंद
कुछ यूजर्स ने यह भी चिंता जताई कि इस तरह का मॉडल लंबे समय तक टिकाऊ नहीं हो सकता. उनका कहना था कि अगर खर्च बहुत ज्यादा बढ़ गया तो कंपनी को भविष्य में छंटनी जैसे फैसले लेने पड़ सकते हैं. इसके अलावा कुछ लोगों ने यह भी कहा कि बेहतर होगा कंपनियां हाइब्रिड या रिमोट वर्क मॉडल को भी गंभीरता से अपनाएं, जिससे कर्मचारियों पर यात्रा का बोझ ही कम हो जाए.