किसी भी वेबसाइट को इस्तेमाल करने के लिए उसका URL जरूरी होता है. यह उस वेबसाइट का एडरेस होता है, जहां आप जाना चाहते हैं. इंटरनेट का इस्तेमाल करते समय कई चीज़े सामने आती है. उन्ही चीज़ों में एक चीज़ है Cookies (कुकीज़). कई बार आपने देखा होगा कि जब आप किसी वेबसाइट को सर्फ कर रहे होते हैं, तो एक पॉप-अप आता है, जो आप्शन देता है कि आप कुकीज़ को एक्सेप्ट करें या रिजेक्ट. लेकिन यूजर्स की एस बड़ी आम बात होती है वह बिना कुछ सोचे कुकीज़ को एक्सेप्ट कर लेते हैं. लेकिन सवाल उठता है कि कुकीज़ आखिर होती क्या है?
क्या होती हैं कुकीज़?
यह असल में कुछ छोटी-छोटी टेक्स्ट फाइल होती हैं. जो आपके द्वारा उस वेबसाइट को ब्राउज करने के दौरान आपकी प्रेफरेंस को सेव करती हैं. यानी एक तरह से यह आपके ब्राउसर से आपकी ब्राउसिंग हिस्ट्री से डाटा कलेक्ट करती हैं. किसी भी वेबसाइट पर कई प्रकार की कुकीज़ मौजूद होती है.
इसी प्रकार से वेबसाइट पर कई प्रकार की कुकीज़ होती हैं, जो आपका डाटा कलेक्ट करती है. अब दिक्कत है कि अगर आपका डाटा कलेक्ट हो रहा है, तो यह आपकी प्राइवेसी के लिए खतरा है. इसलिए यह सोचे जाने वाली बात है कि कुकीज़ को एक्सेप्ट किया जाए या नहीं?
वेबसाइट नहीं कर पाएंगे ब्राउज?
अगर यूजर को वेबसाइट ब्राइज करनी है, तो उसे कुकीज़ तो एक्सेप्ट तो करनी ही होंगी. अगर उसने रिजेक्ट करदी तो संभव हैं कि आप उस वेबसाइट को ब्राउज ही न कर पाएं. लेकिन कुकीज़ पॉप-उस वाले बॉक्स में कई बार आपको एक शानदार ऑप्शन देखने को मिलता है. जिससे आप वेबसाइट भी ब्राउज कर पाते हैं, वो भी कुकीज़ को एक्सेप्ट करने के बाद.
क्या है खास ऑप्शन?
दरअसल कुछ प्रकार की कुकीज़ आपका वेबसाइट को ब्राउज करने के एक्सपीरियंस को बेहतर बनाती है. जब कुछ वेबसाइट पर कुकीज़ वाला पॉप-अप होता है, तो उसमें तीन ऑप्शन हो सकते है. एक्सेप्ट ऑल कुकीज़, मैनेज कुकीज़ और रिजेक्ट कुकीज़. यहां आप कुकीज़ को मैनेज ऑप्शन पर केवल एसेंशियल ऑप्शन सलेक्ट कर सकते हैं. जिससे केवल आपको बेहतर ब्राउसिंग एक्सपीरियंस मिलेगा. आपको उन कुकीज़ से छुटकारा मिलेगा जो आपका डाटा छेड़ प्राइवेसी के मामलात को शक के दायरे में ला देती है.