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बिहार को बुलेट ट्रेन की सौगात! वाराणसी-पटना होते सिलीगुड़ी तक बनेगा हाई स्पीड कॉरिडोर, 2 घंटे 55 मिनट में तय होगी दूरी

बिहार को बुलेट ट्रेन की सौगात मिलने जा रही है. वाराणसी से सिलीगुड़ी के लिए पटना होते हुए बुलेट ट्रेन चलेगी.वाराणसी से पटना होते हुए सिलीगुड़ी के लिए हाई स्पीड कॉरिडोर का निर्माण होगा. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बताया कि बिहार को बुलेट ट्रेन की सौगात दी जाएगी.

Bihar to Get Bullet Train:
जहांगीर आलम
  • समस्तीपुर,
  • 02 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:44 PM IST
  • हाई स्पीड कॉरिडोर से बदलेगी यात्रा
  • वाराणसी से सिलीगुड़ी के लिए चलेगी ट्रेन

बिहार के रेल यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी है. जल्द ही राज्य को बुलेट ट्रेन की सुविधा मिलने जा रही है. वाराणसी से पटना होते हुए सिलीगुड़ी तक हाई स्पीड रेल कॉरिडोर बनाया जाएगा, जिससे यात्रा का समय घटकर महज 2 घंटे 55 मिनट रह जाएगा. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस महत्वाकांक्षी परियोजना की जानकारी दी और कहा कि इससे बिहार में परिवहन व्यवस्था को नई रफ्तार मिलेगी.

हाई स्पीड कॉरिडोर से बदलेगी यात्रा
रेल मंत्री ने बताया कि वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी रूट पर बुलेट ट्रेन चलाने के लिए विशेष हाई स्पीड कॉरिडोर का निर्माण किया जाएगा. इस परियोजना के पूरा होने के बाद यात्रियों को तेज, सुरक्षित और आधुनिक सफर का अनुभव मिलेगा. साथ ही व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

बिहार में चल रहे हजारों करोड़ के प्रोजेक्ट
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि बिहार में फिलहाल 1 लाख 9 हजार 158 करोड़ रुपए की रेल परियोजनाएं संचालित हैं. इनमें से इस बार के बजट में 10 हजार 79 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. उन्होंने इसे राज्य के रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बड़ा निवेश बताया.

वंदे भारत और अमृत भारत ट्रेनों का विस्तार
रेल मंत्री के अनुसार बिहार में पहले से ही 14 वंदे भारत ट्रेनें और 21 अमृत भारत ट्रेनें संचालित हो रही हैं. इन ट्रेनों ने यात्रियों को बेहतर सुविधा और तेज यात्रा का विकल्प दिया है, जिससे रेल नेटवर्क और मजबूत हुआ है.

नॉर्थ ईस्ट कॉरिडोर में AI का इस्तेमाल
सरकार ने नॉर्थ ईस्ट कॉरिडोर की भी घोषणा की है. इस रूट पर हाथियों की सुरक्षा के लिए ऑप्टिकल फाइबर आधारित तकनीक का उपयोग किया जाएगा. साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए पहले ही उनकी मौजूदगी का पता लगाकर ट्रेन संचालन को सुरक्षित बनाया जाएगा.

 

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