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रेलवे स्टेशनों पर अब मिलेगा और साफ-सुरक्षित पानी, 20 हजार जगहों पर लगेंगे नए फिल्ट्रेशन सिस्टम

भारतीय रेलवे में यात्रियों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए उठाए जा रहे कदमों के तहत सेंट्रल रेलवे ने अपने नेटवर्क में पानी की आपूर्ति, फिल्ट्रेशन, जांच और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की प्रक्रिया तेज कर दी है.

Railway
दीपेश त्रिपाठी
  • मुंबई ,
  • 21 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 2:36 PM IST

रेलवे से सफर करने वाले यात्रियों के लिए पीने के पानी को लेकर बड़ी पहल की जा रही है. यात्रियों को साफ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सेंट्रल रेलवे ने पानी की सप्लाई, फिल्ट्रेशन, जांच और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की प्रक्रिया तेज कर दी है. यह कदम CAG की रिपोर्ट के बाद रेलवे बोर्ड की ओर से की गई समीक्षा और दिए गए निर्देशों के तहत उठाया गया है.

20 हजार जगहों पर लगाए जाएंगे नए फिल्ट्रेशन सिस्टम
रेलवे बोर्ड के निर्देश के बाद सेंट्रल रेलवे ने स्टेशनों, कोचिंग डिपो और यात्रियों से जुड़े दूसरे स्थानों पर पेयजल व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है. रेलवे के मुताबिक, पानी की गुणवत्ता पर टैंक से लेकर नल तक पूरी सप्लाई लाइन पर नजर रखी जा रही है.

रेलवे नेटवर्क में करीब 20 हजार स्थानों पर नए फिल्ट्रेशन सिस्टम लगाने की योजना है. इनमें वाटर कूलर और पानी की गुणवत्ता की निगरानी से जुड़ी व्यवस्थाएं भी शामिल हैं. पुराने और खराब हो चुके पानी के टैंकों की पहचान कर उन्हें धीरे-धीरे बदला जा रहा है.

पानी की जांच और टैंकों की सफाई पर जोर
पानी की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए पानी के स्रोत और नल से निकलने वाले पानी, दोनों की नियमित जांच की जा रही है. स्टोरेज टैंकों की समय-समय पर सफाई और रखरखाव भी किया जा रहा है. इसके साथ ही निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है.

चार स्टेशनों पर चलाया गया विशेष अभियान
CAG की 2023-24 की रिपोर्ट में CSMT, भिवंडी रोड, कल्याण और लोनावला स्टेशनों से लिए गए पानी के नमूनों को लेकर टिप्पणियां की गई थीं. इसके बाद सेंट्रल रेलवे ने इन चारों स्टेशनों पर विशेष जांच अभियान चलाया. इस दौरान पानी की भौतिक, रासायनिक और बैक्टीरियोलॉजिकल जांच की गई. रेलवे के अनुसार, सभी नमूने संतोषजनक पाए गए और किसी भी नमूने में ई. कोलाई या बैक्टीरियोलॉजिकल संदूषण नहीं मिला.

पाइपलाइन और वाटर कूलर की भी हुई जांच
अभियान के दौरान पानी की पाइपलाइन में लीकेज की जांच की गई. टैंकों के वेंट और ओवरफ्लो सिस्टम पर जाली वाले टाइट कवर लगाए गए. वाटर कूलरों की सफाई कर गाद हटाई गई. खराब या लीकेज वाले नलों को बदला गया और जरूरत वाली जगहों पर नए नल लगाए गए. इसके अलावा संबंधित इंस्पेक्टर ऑफ वर्क्स कार्यालयों में ई. कोलाई टेस्टिंग किट भी उपलब्ध कराई गई हैं. सेंट्रल रेलवे के मुताबिक, ताजा जांच में इन चारों स्टेशनों पर यात्रियों को उपलब्ध कराया जा रहा पेयजल सुरक्षित और पीने योग्य पाया गया है.

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