चारधाम यात्रा होगी और आसान! बद्रीनाथ-केदारनाथ हाईवे को जोड़ने वाली 900 मीटर लंबी सुरंग तैयार... जल्द ही शुरू होगा ट्रायल

रुद्रप्रयाग जिले में बद्रीनाथ और केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग को जोड़ने वाली 900 मीटर लंबी सुरंग का निर्माण पूरा हो गया है. रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने बताया कि पुल का निर्माण 31 अगस्त तक पूरा होने की संभावना है.

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gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 22 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 9:40 AM IST

उत्तराखंड में चारधाम यात्रा को और सुरक्षित, तेज और सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक बड़ी सफलता मिली है. रुद्रप्रयाग जिले में बद्रीनाथ और केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग को जोड़ने वाली 900 मीटर लंबी सुरंग का निर्माण पूरा हो गया है. इसके साथ ही अलकनंदा नदी पर बन रहा 200 मीटर लंबा दो लेन का मोटर पुल भी अंतिम चरण में पहुंच चुका है. अधिकारियों का कहना है कि 31 अगस्त के बाद इस पुल पर वाहनों का ट्रायल शुरू किया जा सकता है. यदि परीक्षण सफल रहता है, तो चारधाम यात्रा के अगले चरण में श्रद्धालुओं को इसी नए मार्ग से आवाजाही की सुविधा मिलेगी.

सुरंग और पुल से मिलेगा नया रास्ता
यह सुरंग ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग को केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ती है. यह परियोजना चारधाम यात्रा के दौरान बढ़ते ट्रैफिक को कम करने और यात्रियों की यात्रा को आसान बनाने के उद्देश्य से तैयार की गई है. सुरंग के साथ बनाया जा रहा 200 मीटर लंबा दो लेन का पुल भी अब लगभग तैयार है.

31 अगस्त के बाद होगा वाहन ट्रायल
रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने बताया कि पुल का निर्माण 31 अगस्त तक पूरा होने की संभावना है. इसके बाद गुणवत्ता, सुरक्षा और तकनीकी मानकों की जांच के लिए वाहनों का ट्रायल किया जाएगा. सभी परीक्षण सफल रहने पर इस नए मार्ग को आम लोगों और श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा.

रुद्रप्रयाग बाजार के जाम से मिलेगी राहत
फिलहाल बदरीनाथ हाईवे रुद्रप्रयाग बाजार से होकर गुजरता है, जहां सड़क संकरी होने के कारण अक्सर लंबा जाम लग जाता है. नया मार्ग शुरू होने के बाद श्रद्धालु जवाड़ी बाईपास के जरिए सीधे बदरीनाथ और केदारनाथ की ओर जा सकेंगे. इससे बाजार क्षेत्र में ट्रैफिक का दबाव कम होगा और यात्रा का समय भी घटेगा. अधिकारियों का कहना है कि यह परियोजना केवल ट्रैफिक कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि चारधाम यात्रा की पूरी व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. इससे हर साल लाखों श्रद्धालुओं को अधिक सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित यात्रा का अनुभव मिलेगा.

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