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सिर्फ कुर्सी की ही बात है! गार्ड को नहीं मिली चेयर तो प्लेटफॉर्म पर खड़ी रही ट्रेन...बोला-कुर्सी मिलेगी तभी ट्रेन आगे ले जाऊंगा

नई दिल्ली से ललितग्राम जाने वाली 15566 वैशाली एक्सप्रेस सुबह करीब 9:47 बजे गोरखपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर पहुंची थी. यहां लखनऊ से गोरखपुर तक ड्यूटी करने वाले ट्रेन गार्ड ने अपना टूल बॉक्स उतार लिया.

Vaishali Express
गजेंद्र त्रिपाठी
  • गोरखपुर,
  • 19 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 11:02 AM IST

गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर बुधवार को वैशाली एक्सप्रेस करीब 38 मिनट तक इसलिए खड़ी रही, क्योंकि ट्रेन के गार्ड को बैठने के लिए कुर्सी नहीं मिली. गार्ड यान में लगी कुर्सी टूटी हुई थी और बैठने लायक नहीं थी. गोरखपुर से ट्रेन की कमान संभालने पहुंचे गार्ड ने कुर्सी उपलब्ध होने तक ट्रेन आगे ले जाने से इनकार कर दिया. ट्रेन का सिग्नल हो चुका था, लेकिन गार्ड अपनी मांग पर अड़े रहे.

मामला बढ़ा तो रेलवे अधिकारियों ने गार्ड को समझाया और आगे बैठने की व्यवस्था कराने का आश्वासन दिया. इसके बाद गार्ड ने स्टेशन अधीक्षक को मेमो दिया और ट्रेन को आगे रवाना किया. खास बात यह रही कि देवरिया स्टेशन पहुंचने पर गार्ड को बैठने के लिए एक छोटा टेबल उपलब्ध कराया गया.

सुबह 9:47 बजे गोरखपुर पहुंची थी ट्रेन
नई दिल्ली से ललितग्राम जाने वाली 15566 वैशाली एक्सप्रेस सुबह करीब 9:47 बजे गोरखपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर पहुंची थी. यहां लखनऊ से गोरखपुर तक ड्यूटी करने वाले ट्रेन गार्ड ने अपना टूल बॉक्स उतार लिया. इसके बाद गोरखपुर से आगे की ड्यूटी के लिए गार्ड रामाशीष दास पहुंचे. उन्होंने गार्ड यान में देखा तो वहां बैठने के लिए कुर्सी नहीं थी. जो कुर्सी पहले से थी, वह टूटी हुई थी. गार्ड ने स्टेशन प्रबंधन से इसकी शिकायत की और बैठने की व्यवस्था कराने को कहा.

कुर्सी मिलेगी तभी ट्रेन आगे ले जाऊंगा
गार्ड की शिकायत पर तत्काल व्यवस्था नहीं हुई तो उन्होंने ट्रेन आगे ले जाने से मना कर दिया. उनका कहना था कि गोरखपुर से बरौनी तक उन्हें ड्यूटी करनी है और वह पूरी यात्रा खड़े होकर ड्यूटी नहीं करेंगे. इससे पहले लखनऊ से गोरखपुर तक आए गार्ड ने अपने टूल बॉक्स पर बैठकर सफर किया था. लेकिन गोरखपुर से चार्ज लेने वाले गार्ड के पास ट्रॉली बैग था, इसलिए उनके पास बॉक्स पर बैठने का विकल्प भी नहीं था. इधर ट्रेन का सिग्नल हो चुका था, लेकिन गार्ड की कुर्सी वाली शर्त के कारण ट्रेन आगे नहीं बढ़ सकी. करीब 38 मिनट तक ट्रेन लेट हुई.

अधिकारियों ने समझाया, फिर दिया मेमो
मामला अधिकारियों तक पहुंचा तो उन्होंने गार्ड को समझाया कि आगे बैठने की व्यवस्था करा दी जाएगी. इसके बाद गार्ड ने स्टेशन अधीक्षक को मेमो भेजा और ट्रेन को आगे रवाना किया. मेमो में गार्ड ने लिखा कि गोरखपुर पहुंचने पर गार्ड यान में कुर्सी उपलब्ध नहीं थी. कुर्सी नहीं मिलने के कारण ट्रेन को देरी हुई. उन्होंने यह भी दर्ज किया कि देवरिया स्टेशन पर उन्हें बैठने के लिए एक छोटा टेबल उपलब्ध कराया गया.

रेलवे बोला- गार्ड यान में इनबिल्ट चेयर होती है
मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सुमित कुमार ने बताया कि वैशाली एक्सप्रेस करीब 38 मिनट लेट हुई थी. उन्होंने कहा कि यह ट्रेन ईस्ट सेंट्रल रेलवे (ECR) की है और गोरखपुर में इसका सिर्फ ट्रू पासिंग होता है. रेलवे के मुताबिक, गार्ड यान में एक इनबिल्ट चेयर होती है. अलग से स्टूल या कुर्सी उपलब्ध कराने का प्रावधान नहीं है. अधिकारी ने बताया कि ट्रेन दिल्ली से गोरखपुर तक आई थी और इस दौरान किसी अन्य गार्ड ने इस संबंध में आपत्ति नहीं जताई थी. जिस गार्ड ने आपत्ति की, वह बरौनी के गार्ड बताए गए हैं. मामले में लखनऊ मंडल की ओर से सोनपुर मंडल को आधिकारिक कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया है.

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