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Kashi: महादेव की नगरी काशी जाइए तो विश्वनाथ मंदिर सहित इन जगहों का जरूर कीजिए दीदार

केवल काशी ही नहीं, काशी के आस-पास के धार्मिक स्थल भी आपके यात्रा को खास बनाते हैं. तो आइए जानते हैं, काशी के आस-पास के उन प्राचीन और ऐतिहासिक जगहों के बारे में जो हैं पुराण की धरोहर का हिस्सा. तो चलिए, चलते हैं लेख के माध्यम से काशी के सफर पर...

काशी विश्वनाथ मंदिर
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 29 नवंबर 2025,
  • अपडेटेड 4:13 PM IST

अगर आप आध्यात्मिक यात्रा करना पसंद करते हैं तो जीवन में एक बार जरूर काशी जाएं. काशी का शिवलिंग 12 ज्योतिर्लिंग में से एक माना जाता है. इस जगह की अपनी महिमा है. कहते हैं कि भगवान शिव यहां स्वयं निवास करते हैं. काशी का जितना प्राचीन इतिहास है, उतना ही प्राचीन है काशी शहर. यह शहर जीवन के साथ-साथ मृत्यु का संगम है. अगर आप जीवन और मृत्यु को करीब से महसूस करना या समझना चाहते हैं, तो जीवन में एक बार काशी जरूर जाएं. यहां की हर गली, हर घाट, हर घंटी की आवाज में महादेव की शक्ति बसती है. काशी आने वाले हर यात्री की पहली इच्छा काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन करने की होती है. लेकिन अगर आप 4 से 5 दिनों की छुट्टी में काशी आ रहें हैं तो इन कुछ जगह पर घूमने का प्लान कर के आइए. यह जगह भी अपने आप में बड़ा धार्मिक महत्व रखते हैं. इन जगहों पर जाना आपकी यात्रा को और यादगार बना देगा.

काशी विश्वनाथ मंदिर
काशी की पहचान काशी विश्वनाथ मंदिर से ही होती है. यह मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहां आने वाला हर भक्त अपनी मनोकामनाओं को शिवजी के चरणों में छोड़कर जाता है. मंदिर का वातावरण इतना सकारात्मक होता है कि घंटों लाइन में खड़े होने पर भी थकान महसूस नहीं होती. मंदिर परिसर में गंगा जल, मंत्रोच्चारण और शिव भक्ति की ध्वनि मन को गहराई से शांति देती है.

मणिकर्णिका घाट जीवन और मृत्यु का संगम
कुंभ, आरती, मंत्रोच्चार और सनातन परंपराओं का सबसे गहरा रूप मणिकर्णिका घाट पर देखने को मिलता है. कहते हैं कि ये वह भूमि है जहां मृत्यु आत्मा के परमात्मा से मिलन का त्योहार है. यहां के श्मशान की अग्नि कभी बुझती नहीं चाहे आंधी आए या तूफान. यहां 24 घंटे लाश जलता रहता है. यह घाट जीवन की सच्चाई को बेहद करीब से महसूस करने का मौका देती है. यह घाट मंदिर के पास ही है. यहां की भस्म में महादेव का श्रृंगार होता है.

दशाश्वमेध, अस्सी और अन्य प्रमुख घाट जो है काशी की असली धड़कन

  • दशाश्वमेध घाट- गंगा आरती के लिए सबसे प्रसिद्ध है. शाम की आरती का दृश्य ऐसा होता है जैसे स्वर्ग धरती पर आ गया हो.
  • अस्सी घाट- युवाओं, साधुओं, कलाकारों और योग प्रेमियों का केंद्र. यहां पर सुबह के ध्यान में गूंजती संगीत की आवाज मन को बेहद शांति देती है.
  • हर्ष और शीतला घाट- पुरानी परंपराओं, तीर्थ यात्रा और संस्कृति को करीब से देखने का मौका देते हैं. ठंड के मौसम में इन घाटों का मजा दुगना हो जाता है.
  • काशी स्वाद के लिए भी मशहूर है. अगर काशी आएं है तो यहां के गली और गलियों का खाने का लुत्फ जरूर उठाएं

काशी के कोतवाल काल भैरव मंदिर
कहते हैं कि काशी में रहने या घूमने की अनुमति भी महादेव के गण, काल भैरव, से मिलती है. जब तक उनकी इच्छा नहीं होगी आप काशी में पेर भी नहीं रख सकते हैं. काल भैरव का यह मंदिर बेहद प्रसिद्ध और शक्तिशाली माना जाता है. भक्तों में यह मान्यता हैं कि काल भैरव की कृपा से सभी बाधाएं दूर होती हैं. काशी विश्वनाथ मंदिर के बाद यहां दर्शन के लिए जरूर आएं.

सारनाथ- बुद्ध के त्याग का प्रतीक
काशी से कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित सारनाथ अपनी अनोखी शांति के लिए मशहूर है. यहीं पर भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद पहला उपदेश दिया था. विशाल स्तूप, सुंदर उद्यान, संग्रहालय और बुद्ध की प्राचीन मूर्तियां सारनाथ को बेहद खास बनाती हैं. यहां का माहौल ऐसा है कि कोई भी बैठकर ध्यान करने लगे. काशी की चहल-पहल के बाद सारनाथ एक शांत अनुभव आपके लिए साबित हो सकता है. यहां आने के लिए आप या तो कैब बुक कर सकते हैं या तो ट्रेन के जरिए भी सारनाथ स्टेशन उतर कर सारनाथ पहुंचा जा सकता है.

मां विंध्याचल 
काशी से करीब एक घंटे की दूरी पर स्थित है विंध्याचल शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र. यहां मां विंध्यवासिनी, मां अष्टभुजा और मां कालीखोह विराजमान हैं. इस मंदिर के दर्शन से भक्तों को दिव्य ऊर्जा महसूस होती है. नवरात्र के समय यहां लाखों भक्त आते हैं. माना जाता है कि मां विंध्यवासिनी की कृपा से जीवन के सारे दुख दूर होते हैं. यहां भी आप कैब बुक करके आ सकते है. अगर ट्रेन से जाना पसंद करते हैं तो आप माधो सिंह या मिर्जापुर रेलवे स्टेशन उतर कर आगे की यात्रा कर सकते हैं.

सीतामढ़ी
काशी से थोड़ी दूर स्थित सीतामढ़ी एक पौराणिक और बेहद भावुक जगह है. मान्यता है कि यहीं माता सीता धरती माता की गोद में समा गई थीं. इस स्थान पर बने मंदिर और प्राचीन कुआं आज भी उस ऐतिहासिक क्षण की गवाही देते हैं. यहां का वातावरण बेहद शांत और पवित्र है. लोग यहां आकर भावुक भी हो जाते हैं क्योंकि यह मंदिर उस कहानी को बयान करता है जो रामायण की प्रमुख और दुखद घटनाओं में से एक है. यहां पहुंचने के लिए सब से पास का रेलवे स्टेशन ज्ञानपुर रोड है.

बाकी अगर आपके पास वक्त हैं तो कुछ दूर पर प्रयागराज है, वहां जाकर संगम में डुबकी जरूर लगाएं. कहते हैं कि वहां गंगा, जमुना और अप्रत्यक्ष रूप से मां सरस्वती का मिलन होता है. संगम में नहाने से मन पवित्र  और शांत होता है.

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