ओडिशा के पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. खासकर रथ यात्रा के दौरान यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. अगर आप भी जगन्नाथ मंदिर के दर्शन के लिए पुरी जा रहे हैं, तो मंदिर के आसपास कई ऐसी खूबसूरत और ऐतिहासिक जगहें हैं, जो आपकी यात्रा को और भी खास बना सकती हैं. समुद्र तट से लेकर विश्व धरोहर स्थल, प्राकृतिक झील और कला से भरपूर गांव तक, यहां हर तरह के पर्यटकों के लिए कुछ न कुछ खास मौजूद है. आइए जानते हैं जगन्नाथ मंदिर के पास घूमने लायक 5 बेहतरीन जगहों के बारे में.
पुरी बीच
जगन्नाथ मंदिर से करीब 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पुरी बीच अपनी सुनहरी रेत, शांत वातावरण और समुद्रों के लिए प्रसिद्ध है. मंदिर दर्शन के बाद यहां कुछ समय बिताकर सुकून का अनुभव किया जा सकता है. यह बीच ब्लू फ्लैग प्रमाणित है, जो इसकी स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षा मानकों को दर्शाता है.
कोणार्क सूर्य मंदिर
जगन्नाथ मंदिर से लगभग एक घंटे की दूरी पर स्थित कोणार्क सूर्य मंदिर भारत की सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक धरोहरों में से एक है. 13वीं शताब्दी में बने इस मंदिर को भगवान सूर्य को समर्पित किया गया है. इसकी अद्भुत वास्तुकला दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करती है. साल 1984 में इसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा भी मिला था.
चिलिका झील
अगर आप नेचर लवर हैं, तो जगन्नाथ मंदिर से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित चिलिका झील जरूर जाएं. यह एशिया की सबसे बड़ी खारे पानी की झील और दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी तटीय लैगून है. यहां बोटिंग का आनंद लिया जा सकता है. साथ ही डॉल्फिन देखने और प्रसिद्ध कालीजई मंदिर के दर्शन का भी अवसर मिलता है.
रघुराजपुर हेरिटेज विलेज
जगन्नाथ मंदिर से करीब 20 से 25 मिनट की दूरी पर स्थित रघुराजपुर हेरिटेज विलेज ओडिशा की समृद्ध कला और संस्कृति का अनूठा उदाहरण है. यहां के कलाकार पारंपरिक पट्टचित्र कला, ताड़पत्र पर नक्काशी और हस्तशिल्प के लिए प्रसिद्ध हैं. गांव में बनाई जाने वाली अधिकांश कलाकृतियां भगवान जगन्नाथ से जुड़ी होती हैं.
नरेंद्र टैंक
जगन्नाथ मंदिर से केवल 1 किलोमीटर दूर स्थित नरेंद्र टैंक, जिसे नरेंद्र पोखरी भी कहा जाता है, पुरी के सबसे बड़े जलाशयों में से एक है. इसका निर्माण 15वीं शताब्दी में राजा नरेंद्र देव के शासनकाल में कराया गया था. धार्मिक दृष्टि से यह स्थान बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यहां हर वर्ष प्रसिद्ध चंदन यात्रा का आयोजन किया जाता है.
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