रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को मिलने वाले पीने के पानी को लेकर अब रेलवे ने बड़ा कदम उठाया है. दरअसल, CAG की रिपोर्ट में देश के कई रेलवे स्टेशनों पर पानी की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए थे. कुछ स्टेशनों के वॉटर कूलर में E.coli जैसे हानिकारक बैक्टीरिया पाए जाने की बात सामने आई थी. रिपोर्ट के बाद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों के साथ पूरे दिन समीक्षा की और स्टेशनों पर सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए तुरंत सुधार के निर्देश दिए.
512 से ज्यादा स्टेशनों के ऑडिट में सामने आई कमियां
CAG ने 512 से ज्यादा रेलवे स्टेशनों का ऑडिट किया था. इस दौरान यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं में कई तरह की कमियां सामने आईं. रिपोर्ट में बताया गया कि रेलवे मंत्रालय ने यात्री सुविधाओं को लेकर कई मानक तय किए थे, लेकिन अलग-अलग रेलवे जोन इन नियमों का पूरी तरह पालन नहीं कर पाए. इसी वजह से स्टेशनों पर पानी और दूसरी यात्री सुविधाओं से जुड़ी कई कमियां सामने आईं. इनमें वॉटर कूलर के पानी में E.coli की मौजूदगी और वॉशरूम में साफ-सफाई की खराब स्थिति भी शामिल थी.
49 और 56 स्टेशनों से लिए गए पानी के सैंपल
CAG रिपोर्ट के मुताबिक, 2022-23 के दौरान आठ रेलवे जोन के 49 स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म के नलों से पीने के पानी के सैंपल लिए गए थे. वहीं 2023-24 में नौ जोन के 56 स्टेशनों से पानी के सैंपल लिए गए. इन सैंपल की जांच में टोटल कॉलीफॉर्म बैक्टीरिया पाए गए, जिनमें E.coli भी शामिल है. रिपोर्ट सामने आने के बाद रेलवे बोर्ड ने इस मामले में तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने शुरू कर दिए.
20 हजार जगहों पर लगेगा नया फिल्ट्रेशन सिस्टम
रेलवे मंत्रालय के मुताबिक, अब करीब 20 हजार जगहों पर नया ‘टैंक-टू-टैप’ वॉटर फिल्ट्रेशन सिस्टम लगाया जाएगा. इसमें वॉटर कूलर भी शामिल हैं. इसके अलावा रेलवे नेटवर्क में करीब 20 हजार प्वाइंट पर पानी को फिल्टर करने और उसकी निगरानी करने की पूरी व्यवस्था तैयार की जाएगी.
रेलवे की ओर से पानी की टंकियों को बदलने, पानी की नियमित जांच को सख्ती से लागू करने और पानी के स्रोत व आउटलेट दोनों जगह टेस्टिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं.
सफाई और निगरानी पर भी रहेगा फोकस
रेलवे ने पानी की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए सेंट्रलाइज्ड मॉनिटरिंग और जवाबदेही की व्यवस्था करने की बात कही है. स्टोरेज टैंकों की तय समय पर सफाई और मेंटेनेंस भी कराया जाएगा.
रेल मंत्रालय ने कहा कि यह उसके लिए प्राथमिकता वाला क्षेत्र है और इसकी निगरानी सीधे रेलवे बोर्ड के स्तर पर की जाएगी. पानी की गुणवत्ता और सुधार से जुड़ी प्रगति रिपोर्ट समय-समय पर जारी की जाएगी, ताकि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे. रेलवे के मुताबिक, यह कदम सिर्फ पानी की समस्या तक सीमित नहीं है, बल्कि CAG की रिपोर्ट में सामने आई सभी कमियों को दूर करने और यात्रियों के सफर को बेहतर और सुरक्षित बनाने की बड़ी कोशिश का हिस्सा है.
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