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आपकी गाड़ी में बढ़ेगी सेफ्टी! सरकार ने बदले वाहन सुरक्षा मानक, एक-एक करके लागू होंगे नए नियम

सरकार ने मोटर वाहन सुरक्षा मानकों में बदलाव किया है. नए मानकों में मुसाफिरों की सुरक्षा पर विशेष फोकस किया गया है. नए मानकों में फ्रंटल और साइड क्रैश के दौरान मुसाफिरों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है. इसके साथ ही पैदल चलने वाले मुसाफिरों की सुरक्षा का भी ध्यान रखा गया है.

New Vehicle Safety Rules
आशुतोष मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 22 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 7:12 AM IST

सड़क दुर्घटनाओं में यात्रियों की सुरक्षा मजबूत करने और वाहनों को आधुनिक सुरक्षा तकनीकों से लैस करने के लिए केंद्र सरकार ने मोटर वाहन सुरक्षा मानकों में संशोधन किया है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की 19 अक्टूबर 2026 को जारी अधिसूचना के तहत केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 से संबंधित विभिन्न सुरक्षा प्रावधानों में बदलाव किए गए हैं. नए मानक अलग-अलग चरणों में लागू होंगे, जिससे वाहन निर्माताओं को निर्धारित समयसीमा के अनुसार तैयारी करनी होगी. संशोधित प्रावधानों में फ्रंटल और साइड क्रैश के दौरान यात्रियों की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया है. इसके साथ ही पीछे से टक्कर होने की स्थिति में ईंधन प्रणाली और इलेक्ट्रिक पावरट्रेन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी मानकों को अपडेट किया गया है. वाहन नियंत्रण प्रणालियों और स्टीयरिंग से जुड़े सुरक्षा प्रावधानों में भी बदलाव किए गए हैं.

पैदल यात्रियों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान-
नए नियमों में पैदल यात्रियों और अन्य असुरक्षित सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी गई है. अधिसूचना के अनुसार, नए वाहन मॉडलों के लिए संबंधित संशोधित मानक 1 अक्टूबर 2028 से लागू होंगे. इसके अतिरिक्त, पैदल यात्रियों की सुरक्षा जांच के लिए फ्लेक्सिबल पेडेस्ट्रियन लेग इम्पैक्टर (FlexPLI) परीक्षण उपकरण का अनिवार्य इस्तेमाल 1 अक्टूबर 2032 से प्रस्तावित किया गया है. 

इमोबिलाइजर और EDR भी होंगे अहम-
एम1 श्रेणी की कारों में इमोबिलाइज़र की अनिवार्य फिटिंग के लिए 1 अक्टूबर 2027 की समयसीमा निर्धारित की गई है. इमोबिलाइजर वाहन को अनधिकृत तरीके से स्टार्ट होने से रोकने में मदद करता है. वहीं, इलेक्ट्रॉनिक डेटा रिकॉर्डर (EDR) से जुड़े मानकों को भी शामिल किया गया है. यह उपकरण दुर्घटना से संबंधित महत्वपूर्ण आंकड़े रिकॉर्ड करने में मदद करता है, जिससे हादसों के कारणों की जांच में सहायता मिल सकती है. सरकार के इस कदम से वाहन सुरक्षा तकनीकों को बढ़ावा मिलने और सड़क दुर्घटनाओं में चोटों का जोखिम कम करने की उम्मीद है. हालांकि, इन प्रावधानों का प्रभाव उनके प्रभावी क्रियान्वयन और निर्धारित मानकों के अनुपालन पर निर्भर करेगा.

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