दिवाली और छठ पर घर जाने की तैयारी कर रहे हैं, तो इस बार फ्लाइट टिकट आपका बजट बिगाड़ सकता है. देश के बड़े शहरों से बिहार और उत्तर भारत के दूसरे शहरों के लिए फ्लाइट का किराया काफी बढ़ गया है. मुंबई से पटना और बेंगलुरु से पटना जाने वाली फ्लाइट का एक तरफ का किराया 25-26 हजार रुपए तक पहुंच गया है. कुछ तारीखों पर यह किराया 35 हजार रुपए से भी ज्यादा है. ऐसे में त्योहार पर घर जाने के लिए लोगों को पहले से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं.
क्यों बढ़ रहे फ्लाइट के दाम?
त्योहारों के दौरान बड़ी संख्या में लोग अपने घर लौटते हैं. दिवाली और छठ के आसपास बिहार जाने वाली फ्लाइट की मांग खास तौर पर बढ़ जाती है. जब कम समय में ज्यादा लोग टिकट बुक करते हैं, तो उपलब्ध सीटों के हिसाब से किराया बढ़ जाता है.
इसके अलावा हवाई ईंधन यानी एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) की ऊंची कीमतें भी विमान कंपनियों की लागत बढ़ाती हैं. घरेलू उड़ानों के टिकटों पर सरकार की ओर से सामान्य तौर पर कोई तय अधिकतम किराया सीमा नहीं है. ऐसे में ज्यादा मांग और सीमित सीटों के कारण किराया काफी ऊपर जा सकता है.
पिछले साल के मुकाबले कितना महंगा हुआ सफर?
LocalCircles के सर्वे में 72% यात्रियों ने कहा कि इस साल त्योहार पर घर जाने के लिए उन्हें 2025 के मुकाबले ज्यादा किराया देना पड़ रहा है. इनमें 45% लोगों ने बताया कि किराया 50 से 100% तक बढ़ा है, जबकि 9% ने कहा कि उन्हें पिछले साल के मुकाबले दोगुने से ज्यादा पैसे देने पड़ रहे हैं. हालांकि, ये आंकड़े सर्वे में शामिल लोगों के अनुभव पर आधारित हैं.
किन रूट पर कितना है किराया?
6 नवंबर के लिए यानी दिवाली से दो दिन पहले मुंबई से पटना का एक तरफ का किराया-
छठ के आसपास की टिकटें भी जरूरत से ज्यादा महंगी
छठ के मौके पर दिल्ली से पटना जाने वालों की जेब पर भी इस बार भारी बोझ पड़ सकता है. फ्लाइट का एक तरफ का किराया करीब 15 हजार रुपए से शुरू हो रहा है. वहीं, ट्रेनों में भीड़ इतनी ज्यादा है कि कई ट्रेनों में टिकट बुकिंग के दौरान 'रिग्रेट' दिखने लगा है. इसका मतलब है कि ट्रेन में सीटें उपलब्ध नहीं हैं और वेटिंग टिकट भी जारी नहीं हो पा रहे हैं. ऐसे में घर जाने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए कन्फर्म टिकट मिलना मुश्किल हो रहा है.
महंगी फ्लाइट के अलावा क्या हैं विकल्प?
ट्रेन: अगर यात्रा की तारीख तय है, तो तुरंत टिकट की उपलब्धता जांचें. कन्फर्म टिकट नहीं मिलने पर रेलवे के नियमों के मुताबिक तत्काल टिकट या दूसरी ट्रेन का विकल्प देख सकते हैं.
बस: लंबी दूरी के लिए बस का किराया और यात्रा का समय जांचें. बिहार जाने वाले यात्रियों को अपने शहर से सीधे बस नहीं मिलने पर दूसरे शहर तक बस और फिर आगे का सफर करना पड़ सकता है.
कार: परिवार के साथ छठ मनाने घर जा रहे हैं, तो कार से सफर करना भी एक विकल्प हो सकता है. इससे ट्रेन या फ्लाइट की सीटों पर निर्भरता कम होगी और अपनी सुविधा के हिसाब से रुकने और चलने का समय तय कर सकेंगे. अगर निजी कार नहीं है, तो परिवार या दोस्तों के साथ मिलकर किराए की कार लेने का विकल्प भी देख सकते हैं.