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H-1B से F-1 VISA तक, अब अमेरिकन ड्रीम महंगा! ट्रम्प के फैसलों से भारतीयों की मुश्किलें बढ़ीं

अमेरिका के कॉमर्स सेक्रेट्री हावर्ड लुटनिक ने मौजूदा H-1B वीज़ा सिस्टम को “घोटाला” बताते हुए इसमें बड़े बदलाव की घोषणा की है.

US Visa Rules
gnttv.com
  • नई दिल्ली ,
  • 29 अगस्त 2025,
  • अपडेटेड 1:53 PM IST

भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ पर चल रही बहस के बीच अब वीज़ा से संबंधित मुद्दे भी शुरू हो गए हैं. अमेरिका ने विदेशियों को देने वाले स्टूडेंट वीज़ा और H-1B वीज़ा को लेकर बड़ा फैसला किया है जिसका असर लाखों भारतीयों पर पड़ेगा.

अमेरिका के कॉमर्स सेक्रेट्री हावर्ड लुटनिक ने मौजूदा H-1B वीज़ा सिस्टम को “घोटाला” बताते हुए इसमें बड़े बदलाव की घोषणा की है. उन्होंने कहा कि जल्द ही लॉटरी सिस्टम खत्म कर वेतन-आधारित नई प्रणाली लागू की जाएगी.

क्या बदलेगा H-1B वीज़ा सिस्टम में

  • अभी H-1B वीज़ा लॉटरी सिस्टम के जरिए दिया जाता है, लेकिन अब स्किल्ड और ज्यादा वेतन पाने वाले लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी.
  • ग्रीन कार्ड सिस्टम में भी बदलाव होगा.
  • नए नियमों के तहत, ज्यादा वेतन वाली नौकरियों के लिए वीज़ा पहले मिलेगा.
  • वीज़ा के लिए योग्यता, अनुभव और स्किल्स पर भी ज्यादा ध्यान दिया जाएगा.

क्यों हो रहे हैं बदलाव
इकॉनोमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, लुटनिक का कहना है कि औसत अमेरिकी नागरिक की सालाना सैलरी करीब 75,000 डॉलर है, लेकिन ग्रीन कार्ड धारकों की औसत सैलरी 66,000 डॉलर होती है. हमें ऐसा क्यों करना चाहिए? हमें सबसे योग्य और ज्यादा कमाई करने वालों को प्राथमिकता देनी चाहिए.

भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स पर असर

  • हर साल H-1B वीज़ा के 85,000 स्लॉट होते हैं, जिनमें करीब 70% भारतीय आवेदन करते हैं.
  • नए वेतन-आधारित सिस्टम से भारतीय आईटी पेशेवरों पर बड़ा असर पड़ सकता है.
  • ज्यादा सैलरी पाने वाले भारतीयों को फायदा होगा, जबकि कम वेतन वाले आवेदकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

ट्रम्प प्रशासन की नीति का असर

  • डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन पहले भी वेतन-आधारित वीज़ा सिस्टम लाना चाहता था.
  • इसका मकसद था अमेरिकी नौकरियों की सुरक्षा और विदेशी कम वेतन वाले कर्मचारियों की संख्या कम करना.
  • बाइडेन सरकार ने 2021 में इस प्रस्ताव को रोक दिया था, लेकिन अब इसे फिर से लागू करने की तैयारी है.

अगर यह बदलाव लागू होते हैं, तो अमेरिकी कंपनियों में नौकरी पाने के लिए भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स को ज्यादा वेतन और बेहतर स्किल्स दिखानी होंगी. यह कदम अमेरिकी सरकार की “Buy American, Hire American” नीति को आगे बढ़ाएगा.

विदेशी छात्रों के वीज़ा नियमो में बड़े बदलाव 
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने विदेशी छात्रों के वीज़ा नियमों में बड़े बदलाव किए हैं. ट्रम्प प्रशासन ने 2002 में पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश द्वारा शुरू किए गए “ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस” (D/S) सिस्टम को समाप्त कर दिया है. इस फैसले का सीधा असर भारतीय छात्रों पर पड़ेगा, क्योंकि हर साल 3 लाख से ज्यादा छात्र भारत से पढ़ाई के लिए अमेरिका जाते हैं.

क्या था पुराना सिस्टम (D/S सिस्टम)

  • जब तक छात्र फुल-टाइम कोर्स करते थे, उनका F-1 वीज़ा और I-20 फॉर्म मान्य रहता था.
  • छात्र बिना नया वीज़ा लिए बैचलर, मास्टर्स और पीएचडी जैसी लंबी पढ़ाई कर सकते थे.
  • इसके साथ ही, ओपीटी (Optional Practical Training) की छूट भी मिलती थी जैसे सामान्य कोर्स के लिए 1 साल, STEM कोर्स के लिए 3 साल.
  • इस तरह, कोई भी छात्र 12 से 14 साल तक अमेरिका में रह सकता था.

नए नियमों के तहत क्या बदलेगा
1. फिक्स्ड वीज़ा सिस्टम

  • अब F-1 और J-1 वीज़ा की अधिकतम वैधता 4 साल होगी.
  • कुछ मामलों में, जैसे मास्टर्स डिग्री, वीज़ा सिर्फ 2 साल के लिए मिलेगा.
  • अगर आपका कोर्स लंबा है, तो बीच में ही नया वीज़ा लेना पड़ेगा.

2. मास्टर्स और पीएचडी के लिए अलग वीज़ा

  • अगर छात्र बैचलर के बाद मास्टर्स करना चाहते हैं, तो नए वीज़ा के लिए आवेदन करना होगा.
  • दो मास्टर्स डिग्रियां करने के लिए हर नए प्रोग्राम से पहले वीज़ा स्टाम्प करवाना अनिवार्य होगा.

3. ओपीटी (OPT) की अवधि कम हुई

  • पहले ओपीटी खत्म होने के बाद 60 दिन रुकने की छूट मिलती थी.
  • अब यह अवधि घटाकर 30 दिन कर दी गई है.
  • नौकरी तलाशने के लिए छात्रों के पास कम समय होगा.

4. कोर्स या यूनिवर्सिटी बदलने पर रोक

  • पहले छात्र अमेरिका जाकर महंगी यूनिवर्सिटी छोड़कर सस्ती यूनिवर्सिटी में दाखिला ले सकते थे.
  • अब पहले साल में कोर्स या यूनिवर्सिटी बदलने की अनुमति नहीं होगी.

5. एक्सटेंशन ऑफ स्टे (Extension of Stay) जरूरी

  • अगर कोई छात्र अपनी तय अवधि से ज्यादा रहना चाहता है, तो उसे गृह सुरक्षा विभाग (DHS) से वीज़ा विस्तार के लिए आवेदन करना होगा.
  • नियम तोड़ने पर तुरंत कार्रवाई हो सकती है.

भारतीय छात्रों पर असर

  • नए नियमों से भारतीय छात्रों की परेशानियां बढ़ सकती हैं.
  • अब लंबी पढ़ाई करने वाले छात्रों को बार-बार वीज़ा आवेदन करना होगा.
  • नौकरी तलाशने के लिए समय भी पहले से कम हो जाएगा.

US Citizen होने से क्या फायदा है? क्यों भारतीय यूएस के सिटीजन बनना चाहते हैं?
हर साल हज़ारों भारतीय, जो अमेरिका में रहते और काम करते हैं, अमेरिकी नागरिकता (US Citizenship) के लिए आवेदन करते हैं. हाल के आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय प्रवासी उन देशों में शामिल हैं जो सबसे ज्यादा अमेरिकी नागरिकता प्राप्त कर रहे हैं.
इसका कारण सिर्फ़ बेहतर नौकरी नहीं है, बल्कि सुरक्षा, स्थिरता, ग्लोबल अवसर और पारिवारिक फायदे भी हैं.

भारतीयों के लिए अमेरिकी नागरिकता के 5 बड़े फायदे:

1. बेहतर नौकरी और ज्यादा सैलरी के अवसर

  • अमेरिका में IT, हेल्थकेयर, फाइनेंस, इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टर्स में बेहतरीन जॉब्स उपलब्ध हैं.
  • US नागरिकों को फेडरल जॉब्स और उच्च पदों पर प्राथमिकता मिलती है.
  • भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए कैरियर ग्रोथ की कोई सीमा नहीं रहती.

2. ग्लोबल पासपोर्ट पावर

  • अमेरिकी पासपोर्ट से 185 से अधिक देशों में वीज़ा-फ्री या वीज़ा-ऑन-अराइवल एंट्री मिलती है.
  • भारतीय पासपोर्ट की तुलना में कम यात्रा प्रतिबंध होते हैं.
  • बिजनेस, टूरिज़्म और एजुकेशन के लिए इंटरनेशनल ट्रैवल काफी आसान हो जाता है.

3. बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और रिटायरमेंट सुरक्षा

  • US नागरिकों को सोशल सिक्योरिटी बेनिफिट्स और Medicare/Medicaid जैसी सरकारी हेल्थ योजनाओं का लाभ मिलता है.
  • रिटायरमेंट के बाद भी फाइनेंशियल सिक्योरिटी सुनिश्चित होती है.
  • भारतीयों के लिए यह लंबे समय की हेल्थकेयर गारंटी है.

4. बच्चों की उच्च शिक्षा में फायदे

  • US नागरिकों के बच्चों को फेडरल स्टूडेंट लोन, ग्रांट्स और स्कॉलरशिप आसानी से मिलती हैं.
  • पब्लिक यूनिवर्सिटीज में इन-स्टेट ट्यूशन फीस कम हो जाती है.
  • भारतीय परिवारों के लिए अमेरिका में हायर एजुकेशन किफायती और आसान हो जाती है.

5. वोटिंग का अधिकार और परिवार को बुलाने की सुविधा

  • अमेरिकी नागरिकों को वोट देने और नीतियां तय करने का अधिकार मिलता है.
  • US नागरिक अपने माता-पिता, जीवनसाथी और बच्चों को ग्रीन कार्ड दिलाने के लिए जल्दी स्पॉन्सर कर सकते हैं.

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