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Parvez Musharraf Death: एक झटके में पलट दी थी नवाज शरीफ की कुर्सी, जानिए जनरल परवेज मुशर्रफ के अर्श से फर्श पर आने की कहानी

पूर्व पाकिस्तानी सैन्य तानाशाह जनरल परवेज मुशर्रफ का दुबई में निधन हो गया है. वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। मुशर्रफ को दिल और उम्र संबंधी दूसरी कई स्वास्थ्य समस्याएं थीं.

परवेज मुशर्रफ
शताक्षी सिंह
  • नई दिल्ली,
  • 05 फरवरी 2023,
  • अपडेटेड 1:25 PM IST
  • नवाज शरीफ ने बनाया था सेना प्रमुख
  • कारगिल युद्ध की शुरुआत की थी

पाकिस्तान के पूर्व तानाशाह जनरल परवेज मुशर्रफ का लंबी बीमारी के बाद दुबई में निधन में हो गया. मुशर्रफ को दिल और उम्र संबंधी दूसरी कई स्वास्थ्य समस्याएं थीं. 1999 में परवेज मुशर्रफ ने ही तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को बिना बताए भारत के खिलाफ कारगिल युद्ध छेड़ दिया था. उन्होंने सेनाध्यक्ष रहते तख्तापलट कर पाकिस्तान में मार्शल लॉ भी घोषित किया था. परवेज मुशर्रफ का जन्म 11 अगस्त 1943 को हुआ था. वो पाकिस्तान के राष्ट्रपति और सेना प्रमुख रह चुके हैं. परवेज मुशर्रफ वो नाम है, जिसने पाकिस्तान की सियासय में काफी अहम भूमिकाएं निभाई हैं. चलिए आपको उनका अब तक का सफर बताते हैं.

नवाज शरीफ ने बनाया था सेना प्रमुख
1997 में पाकिस्तान के आम चुनावों में जब नवाज शरीफ की जीत हुई तो उन्होंने प्रधानमंत्री बनने के बाद नवाज शरीफ ने जनरल परवेज मुशर्रफ को सेना प्रमुख यानी पाकिस्तान का चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ बनाया. सेना के प्रमुख के तौर पर परवेज मुशर्रफ धीरे-धीरे ताकतवर होते चले गए और सरकार में उनका रसूख बढ़ता गया. 

कारगिल युद्ध की शुरुआत की थी
जनरल परवेज मुशर्रफ को कारगिल युद्ध का जिम्मेदार भी माना जाता है. कारगिल युद्ध के समय को पाकिस्तान की सेना के प्रमुख थे. उस वक्त उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को बिना बताए ही कारगिल युद्ध की शुरुआत कर दी थी. 

नवाज शरीफ का किया था तख्तापलट
साल 1999 में जनरल परवेज मुशर्रफ ने सैन्य तख्तापलट करके नवाज शरीफ को सत्‍ता से बेदखल कर दिया था. हालांकि नवाज शरीफ को पहले से ही इस बात का अंदाजा था, लिहाजा उन्होंने शक के आधार पर पहले से ही मुशर्रफ को सेनाध्यक्ष के पद से हटा दिया था. लेकिन उनके बाद जिस जनरल अजीज को मुशर्रफ की जगह सेना का प्रमुख बनाया गया, वो मुशर्रफ के वफादार निकले. इसके बाद नवाज शरीफ का तख्तापलट कर दिया गया था.

राष्ट्रपति के तौर पर काफी दिनों तक संभाली सत्ता
बाद में परवेज मुशर्रफ को पाकिस्तान का राष्ट्रपति घोषित कर दिया गया था. परवेज मुशर्रफ साल 2001 से 2008 तक पाकिस्तान के राष्ट्रपति रहे. हालांकि बाद में उन्हें पाकिस्तान के सरकारी सिस्टम का शिकार होना पड़ा.

जब सुनाई गई थी मौत की सजा...
पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो हत्याकांड और लाल मस्जिद मामले में जनरल परवेज मुशर्रफ को भगोड़ा तक घोषित किया जा चुका है. दिसंबर 2019 में पाकिस्तान की एक विशेष अदालत ने परवेज मुशर्रफ को राजद्रोह के मामले में दोषी करार देते हुए उनको मौत की सजा सुना दी थी. मुशर्रफ पर साल 2007 में आपातकाल घोषित करने के कारण देशद्रोह का आरोप लगाया गया था.

देशद्रोह का लगा था आरोप
पाक के इतिहास में ऐसा पहली बार था जब किसी पूर्व सेना प्रमुख को राजद्रोह के मामले में अदालत की ओर से सजा-ए-मौत सुनाई गई थी. हालांकि बाद में साल 2020 में  लाहौर हाई कोर्ट ने पाकिस्तान के परवेज मुशर्रफ को मौत की सजा सुनाने वाली विशेष अदालत को असंवैधानिक करार दिया था. लेकिन हाई कोर्ट ने मुशर्रफ को संगीन देशद्रोह का दोषी जरूर माना था.

दुबई में ली आखिरी सांसें
मुशर्रफ को जब पाकिस्तान में जेल जाने का डर सताने लगा तो, वह 2016 में स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर विदेश चले गए. तत्कालीन पाकिस्तानी हुकूमत ने एग्जिट कंट्रोल लिस्ट से मुशर्रफ का नाम हटा लिया था. इतना ही नहीं उनको बाद में देश से बाहर जाने की भी इजाजत मिल गई. वो साल 2016 से दुबई में निर्वासित जीवन जी रहे थे, और आज आखिरकार लंबी बीमारी के चलते उनका निधन हो गया. 

भारत और मुशर्रफ के रिश्ते

कारगिल युद्ध (1999): कारगिल युद्ध को दो बातों के लिए सबसे ज्यादा याद किया जाता है. एक है, भारतीय सेना के अदम्य शौर्य के लिए तो दूसरा मुशर्रफ की कुटिलता के लिए. माना जाता है कि मुशर्रफ ने अपनी राजनीतिक आकांक्षाओं को परवान चढ़ाने के लिए कारगिल का युद्ध छेड़ दिया. उस समय वह पाकिस्तान के सेना प्रमुख थे. अपनी आत्मकथा 'इन द लाइन ऑफ फायर' में उन्होंने लिखा है कि पाकिस्तानी सेना कारगिल युद्ध में शामिल थी. हालांकि इससे पहले पाकिस्तान इस तथ्य को छुपाता रहा था. मुशर्रफ ने हार की शर्मिंदगी से बचने के लिए पूरी जिम्मेदारी तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ पर डाल दी.उन्होंने कहा कि नवाज शरीफ ने कारगिल युद्ध से हाथ खींचने के लिए कहा था.  

आगरा शिखर वार्ता: जुलाई 2001 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और जबरन राष्ट्रपति के पद पर काबिज हुए मुशर्रफ की आगरा में मुलाकात हुई. इस शिखर वार्ता में कश्मीर मसले को लेकर मुशर्रफ के साथ सहमति नहीं बन सकी. मुशर्रफ के अड़ियल रवैये के कारण यह वार्ता पटरी से उतर गई थी. वाजपेयी ने मुशर्रफ कश्मीर में सीमा पार से होने वाली आतंकवादी गतिविधियों को रोकने के लिए कहा था.  

संसद हमला: 2001 में ही भारतीय संसद पर हमला हुआ. इस हमले में पाकिस्तान पोषित लश्कर ए तैयबा और जैश ए मुहम्मद जैसे संगठन शामिल थे. मुशर्रफ ने हमले के काफी सालों बाद यह स्वीकारा था कि वो आतंकवादियों को अपने यहां पर ट्रेनिंग देकर भारतीय सेना से लड़ने के लिए भेजते थे. 
 
जब भारत से डर गए मुशर्रफ: मुशर्रफ ने पुलवामा हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव को खतरनाक स्तर पर बताया था. उन्होंने कहा था कि यदि पाकिस्तान अपने निकटवर्ती देश पर एक परमाणु बम से हमला करता है तो पड़ोसी देश हमें बीस परमाणु बमों से खत्म कर सकता है. 

 

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