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पाकिस्तान के इस अनोखे सिनेमा हॉल को देखकर लोग रह गए हैरान, TV से बनी स्क्रीन और लकड़ी की चौकी पर बैठकर देखते हैं लोग फिल्म

यह वीडियो सिर्फ एक सिनेमाघर की कहानी नहीं है, बल्कि सीमित संसाधनों के बीच लोगों की जुगाड़ और मनोरंजन के तरीके को भी दिखाता है. आधुनिक सुविधाओं की कमी के बावजूद गांव के लोगों ने अपने लिए एक ऐसा देसी थिएटर तैयार कर लिया है, जिसकी चर्चा अब सोशल मीडिया पर भी खूब हो रही है.

Pakistani Viral video
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 16 जून 2026,
  • अपडेटेड 10:18 AM IST

दुनिया एक तरफ जहां मल्टीप्लेक्स और हाईटेक सिनेमाघरों की ओर बढ़ चुकी है, वहीं यह देसी थिएटर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है. सोशल मीडिया पर इन दिनों पाकिस्तान के एक गांव का अनोखा सिनेमाघर चर्चा में है. वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि एक छोटी सी दुकान या कमरे को ही थिएटर का रूप दे दिया गया है. कमरे की दीवार पर एक टीवी लगाया गया है, जिसे बड़े स्पीकर से जोड़ा गया है ताकि दर्शकों को फिल्म का पूरा मजा मिल सके.

कुर्सियां नहीं, लकड़ी की चौकियों पर बैठते हैं दर्शक
वीडियो में सबसे ज्यादा लोगों का ध्यान बैठने की व्यवस्था ने खींचा. यहां दर्शकों के लिए कुर्सियां या सोफे नहीं रखे गए हैं. उनकी जगह लकड़ी की चौकियां बिछाई गई हैं, जिन पर बैठकर लोग फिल्म देखते हैं. साधारण व्यवस्था के बावजूद गांव के लोग यहां पहुंचकर फिल्मों का आनंद लेते हैं. यही वजह है कि इस सिनेमाघर का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है.

थिएटर के बाहर चाय और नाश्ते का भी इंतजाम
इस देसी सिनेमाघर के बाहर भी खास इंतजाम देखने को मिला. मिट्टी के चूल्हे पर चाय बनती नजर आई, जबकि दर्शकों के लिए समोसे, चने और बिस्कुट जैसे सस्ते नाश्ते भी उपलब्ध हैं. यानी फिल्म देखने आए लोग बीच-बीच में चाय-नाश्ते का मजा भी ले सकते हैं. गांव के माहौल में मनोरंजन का यह तरीका लोगों को काफी दिलचस्प लग रहा है.

वीडियो देखकर सोशल मीडिया पर आई प्रतिक्रियाओं की बाढ़
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने भी जमकर प्रतिक्रिया दी. कई लोगों को यह दृश्य अपने बचपन की याद दिला गया.

एक यूजर ने लिखा, "ऐसा सिनेमा घर हमारे यहां हर घर में है." वहीं दूसरे यूजर ने कहा, "हमारे यहां 90 के दशक में ऐसा ही होता था."

एक अन्य यूजर ने मजाकिया अंदाज में लिखा, "1995 में इंडिया में भी ऐसे ही होते थे."

लोगों को याद आए पुराने दिन
वीडियो देखने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने कहा कि यह नजारा उन्हें पुराने दौर में ले गया. कई यूजर्स का कहना था कि जब बड़े-बड़े मल्टीप्लेक्स नहीं हुआ करते थे, तब गांव-कस्बों में इसी तरह लोग टीवी या प्रोजेक्टर पर फिल्में देखा करते थे.
 

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